प्रवासी भारतीय दिवस : NRI day in hindi

प्रवासी भारतीय दिवस : NRI Day

इंसान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले लेकिन उसके मन का एक कोना उसकी अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। हमारा अतीत हमारे वर्तमान का आधारस्तंभ होता है जिस पर भविष्य की इमारत खड़ी होती है। इसी तरह भले ही किन्हीं वजहों से आपको अपनी जन्मभूमि छोड़नी पड़ती हो, चाहे कितने भी लंबे अरसे से आप बाहर रह रहे हों लेकिन आपके मन से अपने मूल स्थान का मोह आसानी से नहीं छूट पता। अपने गांव, अपने देश का नॉस्टैल्जिया यूं ही तो नहीं बना होगा। हमारे देश से हर साल लाखों लोग अपने सुनहरे भविष्य के सपने लिए विदेश की ओर पलायन करते हैं। कोई अच्छी शिक्षा के लिए तो कोई अपना मनचाहा कॅरियर बनाने के लिए, वहीं कोई मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए भी देश छोड़ देता है। ऐसे ही अनिवासी/प्रवासी भारतीयों के लिए भारत सरकार एक साझा मंच प्रदान करती है, जिसे प्रवासी भारतीय दिवस के नाम से जाना जाता है।


प्रवासी भारतीय दिवस NRI day-

भारत सरकार द्वारा 9 जनवरी को प्रत्येक दूसरे वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2003 में हुई थी। प्रवासी भारतीय दिवस शुरू करने का श्रेय लक्ष्मीमल सिंघवी को दिया जाता है जिन्होंने सबसे पहले इसका विचार प्रस्तुत किया था। साल 2003 में प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत हुई, जिसे उस समय प्रत्येक वर्ष मनाया जाने का प्रस्ताव रखा गया था। परंतु 2015 में इसमें फेरबदल किया गया और इसी साल से इसे प्रत्येक 2 वर्ष पर मनाया जाने का फैसला किया गया। तब से लेकर अब तक यह प्रत्येक 2 वर्ष पर मनाया जाता है।


ऐतिहासिक संदर्भ-

भारत के इतिहास में 9 जनवरी को विशेष महत्त्व है, क्योंकि 1915 में 9 जनवरी को ही महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, जिन्होंने देश की राजनीति की दिशा और दशा पूरी तरह से बदल कर रख दी थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य क्रांतिकारी संगठनों ने स्वतंत्रता संग्राम में पूरी लगन के साथ सहभागिता की और देश को आज़ादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी भारत के ऐसे प्रवासी भारतीय थे, जिन्होंने देश की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। इनके योगदान को चिन्हित करने और प्रवासी भारतीयों को अपनी साझा समृद्ध विरासत की याद दिलाने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत की गई।


कैसे मनाया जाता है प्रवासी भारतीय दिवस?

प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी जाती है। इसके लिए स्थान विशेष का चयन किया जाता है और संपन्न होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की जाती है। प्रत्येक प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि और विशेष अतिथि का निर्धारण भी किया जाता है जो अक्सर किसी मैत्रीपूर्ण देश के प्रमुख होते हैं। यह सब कुछ भारतीय विदेश मंत्रालय के तत्वाधान में आयोजित किया जाता है। इसमें विविध प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम भाषण और पुरस्कार वितरण जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के व्यक्तियों के उल्लेखनीय योगदानों को चिन्हित करने के लिए इन्हें पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है।


अब तक संपन्न हुए प्रवासी भारतीय दिवस का संक्षिप्त परिचय-

भारत में पहला प्रवासी भारती दिवस 8-9 जनवरी 2003 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। 2004 में दूसरा प्रवासी भारतीय दिवस भी नई दिल्ली में ही आयोजित किया गया था। इसके बाद 2005 में तीसरा प्रवासी भारतीय दिवस पहली बार दिल्ली से बाहर मुंबई (महाराष्ट्र) में आयोजित किया गया। इसके बाद अलग-अलग बार अलग-अलग शहरों का चयन किया जाने लगा। 2006 में चौथा प्रवासी दिवस भारतीय हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) में आयोजित किया गया। जबकि 2007 में 5वाँ प्रवासी भारतीय दिवस नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसके बाद 2008 में छठवां प्रवासी भारतीय दिवस नई दिल्ली में लगातार दूसरी बार आयोजित किया गया। 2009 में 7वां प्रवासी भारतीय दिवस चेन्नई (तमिलनाडु) में आयोजित किया गया। 2010 में 8वां और 2011 में 9वां प्रवासी भारतीय दिवस नई दिल्ली में आयोजित किया गया। 2012 में 10वां प्रवासी भारतीय दिवस पहली बार जयपुर (राजस्थान) में आयोजित किया गया।

2013 में 11वां प्रवासी भारतीय दिवस केरल में आयोजित किया गया। जबकि 2014 में 12वां प्रवासी भारतीय दिवस फिर से नई दिल्ली में आयोजित किया गया। 2015 में 13वां प्रवासी भारतीय दिवस गांधीनगर (गुजरात) में आयोजित किया गया। इसके बाद से प्रवासी भारतीय दिवस प्रत्येक दो साल में 9 जनवरी को मनाया जाता है। 2017 में 14वां प्रवासी भारतीय दिवस बेंगलुरु (कर्नाटक) में आयोजित किया गया। 2019 में 15वाँ प्रवासी भारतीय दिवस पहली बार वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में आयोजित किया गया। 2021 में 16वाँ प्रवासी भारतीय दिवस नई दिल्ली में आयोजित किया गया। 2023 में 17वाँ प्रवासी भारतीय दिवस इंदौर (मध्य प्रदेश) में मनाया गया। अब अगला यानी 18वां प्रवासी भारतीय दिवस 2025 में मनाया जाएगा।


17वां प्रवासी भारतीय दिवस 2023-

17वां प्रवासी भारतीय दिवस 8 से 10 जनवरी 2023 तक इंदौर में आयोजित किया गया इसका थीम था- “प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति के विश्वसनीय भागीदार (Diaspora: Reliable partners for India’s progress in Amrit Kaal)”. इसमें गुयाना के माननीय राष्ट्रपति मोहम्मद इरफ़ान अली मुख्य अतिथि और सूरीनाम गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री चंद्रिकाप्रसाद संतोखी ने विशेष अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया था। इसके साथ ही 27 प्रवासी भारतीयों को प्रवासी भारतीय सम्मान से पुरस्कृत किया गया था।


प्रवासी भारतीयों से संबंधित प्रमुख योजनाएं-

1.प्रवासी कौशल विकास योजना (PKVY): 

प्रवासी भारतीय कामगारों के कौशल विकास की प्रक्रिया को संस्थागत बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत 2017 में की गई। इसके द्वारा विदेशों में काम करने की इच्छुक भारतीयों को आवश्यक कौशल सिखाए जाने की योजना है।

2.SDPC (Scholarship Programme for Diaspora Children): 

प्रवासी भारतीय बच्चों के लिये छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तौर पर इस योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत स्नातक पाठ्यक्रमों हेतु भारतीय मूल के जरूरतमंद और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले (PIO) और प्रवासी भारतीय (NRI) छात्रों को प्रतिवर्ष छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं।

3.‘भारत को जानो’ कार्यक्रम (Know India Program- KIP): 

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय मूल के युवाओं (18-30 वर्ष) को भारतीय मूल्यों और समकालीन भारत की सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराना है।

4.ई-माइग्रेट सिस्टम: 

यह एक विदेशी नियोक्ता डेटाबेस है। इसके तहत सरकार द्वारा विदेश में रह रहे भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए डेटाबेस तैयार किया जाता है जिससे जरूरत पड़ने पर इनकी मदद की जा सके।

5.VAJRA (visiting advanced joint research faculty) योजना: 

इसमें एक निश्चित समय अवधि के लिए अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रवासी भारतीय भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर अपनी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। यह विदेश में उच्च पदों पर नियुक्त वैज्ञानिक डॉक्टर इंजीनियर मैनेजर या दूसरे प्रोफेशनल हो सकते हैं। 

प्रवासी भारतीय दिवस का महत्त्व-

आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है। रेमिटेंस वह धन है जो विदेशों में बसे लोग अपने मूल देश में भेजते हैं। अब तक विदेशों में बसे भारतीयों की कुल संख्या 2 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जो दुनिया के 150 के करीब देशों में फैले हुए हैं। इनमें भी सबसे अधिक प्रवासी भारतीयों की संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका में है। प्रतिवर्ष भारत से 25 लाख के आसपास लोग पलायन करते हैं। इसके अलावा विदेश में बसने के इच्छुक भारतीयों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में प्रवासी भारतीय दिवस की उपयोगिता भी बढ़ रही है। भारत के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक उन्नति के लिए प्रवासी भारतीयों के सहयोग और सहभागिता की अत्यंत आवश्यकता है। इसके लिए प्रवासी भारतीय दिवस एक अच्छा माध्यम साबित हो सकता है।


© प्रीति खरवार 

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