विश्व जल दिवस 2024: थीम, इतिहास और महत्त्व: World water day in Hindi

 विश्व जल दिवस 2024: थीम, इतिहास और महत्त्व: World water day in Hindi


दुनिया में जितनी भी सभ्यताएं हैं ज़्यादातर नदियों के किनारे ही विकसित हुई हैं। मानव शरीर का भी लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा जल से बना होता है। हमारे रोजमर्रा के कार्यों के लिए पानी एक अनिवार्य आवश्यकता है। पानी न सिर्फ़ मनुष्य के लिए बल्कि सभी जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के लिए अत्यंत आवश्यक है। पेड़-पौधों से हमें भोजन प्राप्त होता है। यहां तक कि मांसाहारी लोगों के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से पेड़-पौधे ही काम आते हैं, क्योंकि खाए जाने वाले पशु-पक्षी भी अधिकतर पेड़-पौधों पर आश्रित होते हैं। हम जानते हैं कि बिना पानी के पेड़-पौधों की कल्पना नहीं की जा सकती, जिससे हमें अनाज, फल, सब्जियां वगैरह प्राप्त होते हैं। इसीलिए कहा जाता है- “जल ही जीवन है”। जल के बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं है। जल के इसी महत्त्व को रेखांकित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को दुनिया भर में ‘विश्व जल दिवस’ मनाया जाता है। 


ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य-

1992 में ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में पर्यावरण एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक प्रस्ताव अपनाया गया और जल के महत्त्व को देखते हुए इस पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श और जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से ‘विश्व जल दिवस’ मनाने की घोषणा की गई। इसके बाद 1993 में पहली बार ‘विश्व जल दिवस’ मनाया गया था। तब से लेकर अब तक प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। 2013 को जल क्षेत्र में सहयोग का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया था। जबकि सतत विकास हेतु जल संबंधी कार्रवाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक 2018 से 2028 को घोषित किया गया है।


विश्व जल दिवस 2024 थीम-

विश्व जल दिवस 22 मार्च 2024 की थीम है- “शांति के लिए जल (Water for peace)।” दुनिया भर में 3 अरब से अधिक लोग सीमा पार से आने वाले पानी के स्रोत पर निर्भर हैं। अब क्योंकि नदी, पहाड़, झील-झरने किसी भी तरह की सीमा से परे होते हैं। मनुष्य ने अपनी सरहद को सीमाओं में बांध लिया है, परंतु प्रकृति को बांधना संभव नहीं है। इसलिए विभिन्न जल स्रोतों के न्यायपूर्ण बंटवारे के लिए साझा समझौतों की आवश्यकता होती है। संयुक्त राष्ट्र के एक आंकड़े के अनुसार, अब तक 153 देशों में से केवल 24 देशों ने ही साझा जल बंटवारे के लिए समझौते की पुष्टि की है। इसलिए ‘विश्व जल दिवस’ इसके लिए एक महत्त्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।


महत्त्व-

हमारी पृथ्वी के 70% हिस्से पर जल की मौजूदगी है, परंतु पीने योग्य जल की मात्रा लगभग 3% के करीब है। इस पीने योग्य जल में से भी दो तिहाई से ज्यादा जमा हुआ या दुर्गम और उपयोग के लिए सुलभ नहीं है। इसे स्पष्ट होता है कि हमें जल संरक्षण की कितनी आवश्यकता है। जिससे वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। ग़ौरतलब है कि 2015 में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों द्वारा अपनाए गए सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के लिए एजेंडा-2030 के 17 लक्ष्यों में से एक है- “सभी के लिए स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना”। ‘विश्व जल दिवस’ इसके लिए एक बेहतर अवसर साबित हो सकता है, जब सभी देश अपने किए गए प्रयासों की समीक्षा करें साथ ही इसमें आवश्यकतानुसार संशोधन और उस पर अमल सुनिश्चित करें।


चुनौतियां-

भारत समेत दुनिया भर में पानी का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। बढ़ती जनसंख्या और पानी के दुरुपयोग की वजह से सभी को स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित कर पाना मुश्किल हो रहा। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में पानी का संकट सबसे ज़्यादा होगा। क्योंकि अब भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है, तो इसके नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं को सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा सामाजिक और आर्थिक तौर पर भी विषमता की खाई बढ़ती जा रही है। एशिया और प्रशांत क्षेत्र में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता दुनिया में सबसे कम है, जबकि जनसंख्या का घनत्व सबसे ज्यादा इसी क्षेत्र में है।


संभावनाएं-

सभी के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तीन मुख्य तरीकों पर अमल करने की आवश्यकता है। उपलब्ध जल का संरक्षण, वर्षागत जल का संग्रहण और जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करना। यानी हमारे पास जो स्वच्छ पीने योग्य जल है, उनको प्रदूषित होने से बचाना साथ ही वर्ष के जल को संरक्षित और संग्रहित करना उपयोगी कदम साबित हो सकता है। इसका एक उदाहरण तमिलनाडु राज्य ने दिया है। वहां पर घर-घर लोगों के द्वारा वर्षा जल का संग्रहण अनिवार्य करने से 5 वर्षों में ही जलस्तर 50% तक बढ़ गया था। इसके साथ ही महत्त्वपूर्ण जल स्रोतों जैसे- नदियों को प्रदूषित होने से बचाना होगा। वॉटर सीवेज ट्रीटमेंट के माध्यम से नदियों में प्रदूषित जल को जाने से रोकना तथा उनकी गुणवत्ता में सुधार करने से भी जल को संरक्षित किया जा सकता है। इसके अलावा ‘विश्व जल दिवस’ के माध्यम से जन-जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किये जा सकते हैं। लोगों को जल के महत्त्व और सुरक्षित और सावधानीपूर्वक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाना आवश्यक है। तभी सही मायने में ‘विश्व जल दिवस’ की सार्थकता साबित होगी और सभी के लिए स्वच्छ जल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।


© प्रीति खरवार 


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