G-20 शिखर सम्मेलन 2023 : G-20 Summit 2023


जी-20 शिखर सम्मेलन 2023 : G-20 Shikhar sammelan 2023

 हाल ही में 9 व 10 सितंबर को दिल्ली में संपन्न हुए G-20 शिखर सम्मेलन की 18वीं बैठक 2023 की चर्चा जोर-शोर से हो रही है। भारत में पहली बार हो रहा G-20 शिखर सम्मेलन और दिल्ली डिक्लेरेशन वैश्विक मीडिया में हर जगह छाया हुआ है। G-20 विश्व के शीर्ष के 20 ताकतवर राष्ट्रों का एक ऐसा समूह है, जो दुनिया के सामने आ रही नई-नई चुनौतियों आर्थिक के बारे में विचार विमर्श करता है। हालांकि गठन के समय इसका उद्देश्य वित्तीय स्थिरता से संबंधित था परंतु समय के साथ इसका विस्तार होता गया और अब विश्व को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दे भी G-20 के दायरे में आ गए हैं।


ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य-

G-20 का औपचारिक गठन तो 26 सितंबर 1999 को हुआ, परंतु इसकी शुरुआत काफ़ी पहले 1975 में हो चुकी थी। 1975 में आए आर्थिक संकट के मद्देनज़र संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, वेस्ट जर्मनी, इटली और जापान ने एक बैठक की, जिसमें आर्थिक चुनौतियों के बारे में विचार विमर्श किया। इसे G-6 यानी ग्रुप का 6 कहा गया। इसके बाद 1976 में इसमें कनाडा भी शामिल हो गया और इस तरह यह 7 राष्ट्रों का एक समूह यानी G-7 बन गया। इसके बाद 1997 में एशिया में भयानक आर्थिक संकट आया और 1998 में रूस भी इससे जुड़ गया और इस प्रकार आठ देशों का यह समूह G-8 कहा जाने लगा। इस प्रकार धीरे-धीरे और भी देश इसमें जुड़ने लगे और 26 सितंबर 1999 को जब इसका औपचारिक गठन हुआ तो इसे G-20 कहा गया। क्योंकि उस समय इसमें देशों की संख्या 20 थी, जिसमें 19 देश और एक यूरोपियन यूनियन शामिल थे।


G-20 का गठन और कार्यप्रणाली-

G-20 की गठन के समय इसका फोकस अर्थव्यवस्था पर था। इसके सम्मेलनों में इसके वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंकों के गवर्नर्स के बीच मीटिंग होती थी। परंतु 2008 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई बैठक से देश के राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री) भी इसमें शामिल होने लगे। 2008 से ही G-20 की बैठक प्रतिवर्ष होने लगी। G-20 बैठक की मेजबानी रोटेशन के आधार पर चुनी जाती है। G-20 में 5 ग्रुप्स हैं, इन ग्रुप्स से एक-एक देश बारी-बारी से G-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करते हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और समावेशी विकास है। ग़ौरतलब है कि G-20 का कोई स्थाई मुख्यालय या सचिवालय नहीं है। जनसंख्या की दृष्टि से G-20 संपूर्ण वैश्विक जनसंख्या का दो तिहाई हिस्सा रखता है। संपूर्ण वैश्विक व्यापार में इसका योगदान 75% और कुल वैश्विक जीडीपी में 85% प्रतिशत है। अब तक G-20 की कुल 17 बैठकें हो चुकी हैं और यह 18वीं बैठक 2023 में भारत में हो रही है।


G-20 सम्मेलन के अंतर्गत 5 और सम्मेलन शामिल हैं, जैसे कि B-20, जिसमें बिजनेस पर फोकस किया जाता है। C-20 जिसमें सिविल सोसाइटी के मुद्दों को केंद्र में रखा जाता है। W-20, इसमें महिलाओं से संबंधित विषयों पर फोकस किया जाता है। Y-20 में युवाओं के मुद्दों पर चर्चा की जाती है। इसी प्रकार T-20 यानी थिंक टैंक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श करते हैं।


G-20 अब बना G-21-

G-20 जैसा कि नाम से स्पष्ट है, 20 राष्ट्रों का समूह था। लेकिन दिल्ली में हुई G-20 शिखर सम्मेलन 2023 में 55 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले अफ्रीकी यूनियन को इसमें शामिल करने के बाद से कुल देशों की संख्या 20 और एक यूरोपियन यूनियन मिलकर 21 हो गई है। वर्तमान में G-20 में शामिल देश हैं -अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपीयन यूनियन, फ्रांस, इंडोनेशिया, भारत, जर्मनी, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और अफ्रीकी यूनियन। ब्राजील दक्षिण अमेरिका का अकेला देश है जो G-20 का सदस्य है। G-20 सदस्यों को पांच भागों में बांटा गया है। भारत ग्रुप-2 का सदस्य है, जिसमें इसके अलावा रूस, साउथ अफ्रीका और तुर्की शामिल हैं। इन स्थाई देशों के अलावा स्पेन एक स्थाई अतिथि देश है, जो हर बार G-20 सम्मेलनों में हिस्सा लेता है। 


G-20 का 18वां सम्मेलन 2023-

अब तक G-20 की कुल 17 बैठकें हो चुकी हैं और इस बार का G-20 शिखर सम्मेलन 2023, 9 और 10 सितंबर भारत (नई दिल्ली) में हो रहा है। यह आयोजन दिल्ली के प्रगति मैदान के ‘भारत मंडपम’ में हुआ। इस बार भारत ने कुल 9 देशों को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया है, जो कि बांग्लादेश, इजिप्ट, मॉरीशस नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात हैं। ग़ौरतलब है कि इसका स्थायी अतिथि देश स्पेन इस बार 2023 के G-20 शिखर सम्मेलन 2023 में किन्हीं कारणों से हिस्सा नहीं ले रहा है।


18वीं G-20 बैठक की शुरुआत 1 दिसंबर 2022 से देशभर में इससे जुड़े कार्यक्रम शुरू किए गए, जो 30 नवंबर 2023 तक जारी रहेंगे। इस बार के G-20 शिखर सम्मेलन का थीम ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ अथवा अंग्रेजी में ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ है। भारत ने इस बार कमल के फूल के साथ धरती को अपना लोगो बनाया है। ये लोगो 3 रंग का है, जो भारतीय झंडे से लिया गया है। और ये रंग हैं- केसरिया, सफेद, हरा और नीला है। G-20 कार्यक्रम के लिए देशभर में 56 आयोजन स्थल हैं, जहां 200 से ज्यादा बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। G-20, 2023 बैठक की शुरुआत उदयपुर (राजस्थान) से हुई। इसके विदेश मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में हुई और वित्त मंत्रियों की बैठक बेंगलुरु (कर्नाटक) में हुई। G-20 के संस्कृति मंत्रियों की बैठक वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुई।G-20 में शामिल सभी राष्ट्रों के प्रतिनिधि के तौर पर एक शेरपा होता है। G-20 देश के शेरपाओं की मीटिंग 3 से 6 सितंबर हुई। 


इस बार के G-20 शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हिस्सा नहीं ले रहे हैं। चीन की तरफ से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बजाय प्रतिनिधि के तौर पर चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग G-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। चीन और रूस के अलावा मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज भी इस G-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। इसी तरह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी जगह प्रतिनिधि के तौर पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को G-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भेजा है।


दिल्ली डिक्लेरेशन 2023-

G-20 के नई दिल्ली सम्मेलन में भारत ने कूटनीतिक चातुर्य का प्रदर्शन करते हुए दो परस्पर विरोधी राष्ट्रों को भी एक मंच पर लाने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की। भारत रूस-यूक्रेन युद्ध पर सभी G-20 राष्ट्रों को एकमत करने में सफल रहा। विश्व का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक और निर्यातक राष्ट्र होने के नाते यूक्रेन की भूमिका वैश्विक खाद्य सुरक्षा और यूएन के समावेशी विकास लक्ष्य (SDG) के संदर्भ में अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही भारत कोयला के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम करने, विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा हेतु विकसित देशों से सहयोग और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण वैश्विक कदम उठाए जाने के लिए साझा विज्ञप्ति जारी करने में कामयाब रहा।


G-20 से संबंधित कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य-

G-20 का पहला शिखर सम्मेलन 2008 में अमेरिका (वॉशिंगटन डीसी) सम्मलेन आयोजित हुआ था। संयुक्त राज्य अमेरिका एकमात्र ऐसा देश है, जिसने 2008-09 में 2 बार G-20 की अध्यक्षता की। साल 2009 और 2010 में G-20 समिट का आयोजन दो-दो बार किया गया था। इसके बाद से प्रतिवर्ष एक बार इसकी बैठक होती है। G-20 सम्मेलन में ट्रोइका की बैठक अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। यहां ट्रोइका से तात्पर्य पिछले G-20 सम्मेलन के अध्यक्ष, वर्तमान G-20 अध्यक्ष और आने वाले G-20 सम्मेलन के अध्यक्ष से है। इस बार के ट्रोइका में इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील शामिल हैं। क्योंकि G-20 की पिछली बैठक 2022 में इंडोनेशिया में हुई थी, वर्तमान 2023 में भारत में हो रही है और 2024 में इसकी अध्यक्षता ब्राजील को मिली है। G-20 की 20वीं बैठक 2025 में साउथ अफ्रीका में होगी। 2020 में पहली बार G-20 की वर्चुअल मीटिंग हुई थी, जिसकी वजह कोविड-19 महामारी थी। इसकी अध्यक्षता सऊदी अरब ने की थी।


चुनौतियां एवं संभावनाएं-

G-20 सम्मेलन महज दुनिया के ताकतवर देशों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि एक ऐसा वैश्विक मंच है जो सम्पूर्ण विश्व की शांति, समृद्धि, सामाजिक-आर्थिक न्याय और मानवाधिकारों के लिए समर्पित है। हालांकि वैश्विक युद्ध, आतंकवाद, मुद्रास्फीति, राजनीतिक मतभेद और अस्थिरता इसकी राह में आने वाली बड़ी चुनौतियां हैं। लेकिन जब विकसित और विकासशील दोनों देश मिलकर एक साथ मिलकर पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रयास करेंगे तो निश्चित तौर समाधान ज़रूर निकलेगा।


© प्रीति खरवार 

Leave a Comment