Malala day in Hindi: मलाला दिवस: Malala Yusufzai

  

परिचय-

दुनिया भर में बच्चों की शिक्षा और महिला अधिकारों का प्रतीक बन चुकी मलाला यूसुफजई के नाम पर Malala day प्रतिवर्ष 12 जुलाई को मनाया जाता है। मलाला का जन्म 12 जुलाई 1957 को पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त में मिंगोरा नामक स्थान पर हुआ था। वही स्थान जो तालिबानियों के कब्जे में था और वहां पर इनका अत्याचार बढ़ता जा रहा था। बचपन से ही संवेदनशील मलाला ने डायरी लिखने की शुरुआत महज़ 11 वर्ष की उम्र में ही कर दी थी। 2009 में ‘गुल मकई’ नाम से बीबीसी उर्दू के लिए लेखन करके मलाला पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रही थी। अपने ब्लॉग में मलाला तालिबानियों की अत्याचार और घाटी के लोगों की समस्याओं के बारे में खुलकर लिखने लगी थी। मलाला की मां टोर पिकाई यूसुफज़ई और पिता ज़िआउद्दीन यूसुफज़ई हैं। जियाउद्दीन यूसुफजई खुद एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। मलाला के माता-पिता प्रगतिशील विचारों के और शिक्षा के हिमायती थे।


आतंकवादी हमला-

घाटी में तालिबानियों के कब्जे की वजह से बहुत सारी पाबंदियों और अत्याचारों का सामना करना पड़ता था। महिलाओं का स्कूल जाना, संगीत सुनना, सिनेमा देखना आदि पर पूरी तरह से मनाही थी और उल्लंघन करने की दशा में भयानक यातनाओं से गुज़रना पड़ता था। यहां तक कि छोटी बच्चियों के भी सार्वजनिक जगहों पर खेलने पर सख़्त मनाही थी। मलाला ने अपने ब्लॉग में इन सब के बारे में विस्तार से लिखा। मलाला पढ़ लिख कर डॉक्टर बनने का ख़्वाब देख रही थी, इसी समय 2009 में तालिबान ने लड़कियों के स्कूल को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जिसमें 200 लड़कियां पढ़ती थीं। इसके साथ ही तालिबान ने यह फ़तवा जारी किया कि अगर इसके बाद भी कोई लड़की स्कूल जाने की कोशिश करती है, तो वह अपनी मौत की ज़िम्मेदार ख़ुद होगी। इसके बावजूद मलाला डरी नहीं और लड़कियों की शिक्षा के अभियान में जोर-शोर से जुटी रही। जिसका नतीजा यह हुआ कि तालिबानियों ने इन्हें 9 अक्टूबर 2012 को स्कूल से वापस आते समय सिर और गर्दन में गोली मारकर जान से मारने का प्रयास किया। इस भयानक हादसे में मलाला गंभीर रूप से घायल हो गईं । पहले इनका इलाज पाकिस्तान में ही हुआ फिर परिस्थितियां बिगड़ने पर इन्हें ब्रिटेन ले जाया गया। जहां क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल के डॉक्टर्स ने जी जान लगाकर मलाला को बचा लिया। इस घटना से मलाला दुनिया भर में लाइमलाइट में आ गईं और इन्हें शिक्षा और महिला अधिकारों के पैरोकार के रूप में जाना जाने लगा। इतने बड़े हादसे के बावजूद मलाला कट्टरपंथियों के आगे झुकीं नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गईं । इस घटना की वजह से Malala day की रूपरेखा तैयार हुई। मलाला की बहादुरी और शिक्षा के प्रति जुनून ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा और बड़े पैमाने पर इसके लिए नए सिरे से विमर्श शुरू हो गया।


योगदान-

शिक्षा के प्रति मलाला के समर्पण, जुनून, साहस और प्रतिबद्धता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन के अवसर पर 12 जुलाई को प्रति वर्ष ‘Malala day’ मनाने की घोषणा की। 2012 में इनकी बहादुरी को देखते हुए पाकिस्तान ने इन्हें अपने दूसरे सर्वोच्च ‘नागरिक बहादुरी पुरस्कार’ से सम्मानित किया। मलाला को 2012 में ही सामाजिक न्याय के लिए ‘मदर टेरेसा पुरस्कार’ भी मिला।   2013 में टाइम मैगजीन ने दुनिया के प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में मलाला को शामिल किया। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित नारीवादी सिमोन के नाम पर स्थापित ‘सिमोन डी बेवॉयर’ पुरस्कार भी इन्हें 2013 में प्राप्त हुआ। इसी साल मलाला को ‘प्राइड ऑफ़ ब्रिटेन’ का खिताब भी हासिल हुआ। मलाला ने अपने पिता ज़ियाउद्दीन यूसुफजई के साथ मिलकर 2013 में ‘मलाला फंड’ बनाया जिसका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा पर काम करना है। 


पुरस्कार व सम्मान-

2014 में बाल अधिकारों के लिए भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ मलाला यूसुफजई को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मलाला 17 वर्ष की उम्र में नोबेल प्राप्त कर दुनिया की सबसे कम उम्र की नोबेल पुरस्कार विजेता बनीं। 2014 में ही मलाला सबसे कम उम्र में लिबर्टी मेडल हासिल करने वाली प्रथम व्यक्ति बनीं। किंग्स कॉलेज ने 2014 में मलाला को मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की। साथ ही इसी साल इन्हें विश्व बाल पुरस्कार (world children’s price for the rights of the child) से भी नवाजा गया। मलाला के योगदान को एक नया मुकाम तब हासिल हुआ जब 2015 में एक क्षुद्र ग्रह (asteroid) का नाम मलाला के नाम पर रखा गया। मलाला ने 2015 में ‘मलाला फंड’ से लेबनान में सीरियाई गृह युद्ध के समय शरणार्थी लड़कियों के लिए स्कूल खोला। संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अप्रैल 2017 में संयुक्त राष्ट्र शांति दूत के रूप में इन्हें नामित किया। मलाला के योगदान को रेखांकित करते हुए कनाडा ने इन्हें देश की मानद नागरिकता भी प्रदान की। इतनी कम उम्र में विश्वस्तर पर Malala day जैसा दिवस मनाया जाना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस प्रकार वैश्विक स्तर पर मलाला के योगदान की वजह से इन्हें 40 से भी अधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए गए।


मलाला द्वारा लिखी गई किताबें-

बचपन से ही लेखन के प्रति झुकाव रखने वाली मलाला ने कई बेस्ट सेलिंग किताबें भी लिखी। जिसमें सबसे पहला नाम है- ‘आई एम मलाला: द गर्ल हू स्टुड अप फॉर एजुकेशन एंड वाज शॉट बाय द तालिबान’ (I am Malala: the girl who stood up for education and was shot by the Taliban)। इसमें इन्होंने अपने साथ हुए तालिबानियों के हमले के बारे में खुलकर लिखा है। इस पर अमेरिकन डायरेक्टर डेविस गुगेनहम ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई जिसे काफी सराहा गया। साथ ही ‘आई एम मलाला: हाउ वन गर्ल स्टैंड अप फॉर एजुकेशन एंड चेंज्ड द वर्ल्ड’ (I am Malala: how one girl stand up for education and changed the world) और शरणार्थी जीवन पर आधारित ‘वी आर डिस्प्लेस्ड: माय जर्नी एंड स्टोरीज फ्रॉम रिफ्यूजी गर्ल्स अराउंड द वर्ल्ड’ (we are displaced: my journey and stories from refugee girls around the world) जैसी किताबें भी दुनिया भर में सराही जा रही हैं।


व्यक्तिगत जीवन-

अपने स्कूल के दिनों में जहां मलाला डॉक्टर बनना चाहती थीं, वहीं इस हादसे के बाद उनका झुकाव राजनीति की तरफ हो गया। शायद मलाला समझ चुकी थीं कि अगर बड़े पैमाने पर बदलाव लाना है तो राजनीति इसके लिए सही माध्यम साबित हो सकता है। इसके लिए उन्होंने 2018 में दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी यानी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया और पॉलिटिक्स, फिलॉसफी और इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की। इसके साथ ही मलाला शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले तमाम अभियानों का हिस्सा बनीं। इन्होंने सार्वजनिक जगहों पर दिए गए अपने भाषणों में हमेशा दुनिया भर के नेताओं को देश की शिक्षा नीतियों को समावेशी बनाने के लिए आग्रह किया। बाल शिक्षा और महिला अधिकारों के लिए मलाला लगातार संघर्ष कर रही हैं। व्यक्तिगत जीवन की बात की जाए तो 2021 में मलाला ने क्रिकेट गवर्निंग बॉडी ऑफ पाकिस्तान के मैनेजर अस्सर मलिक से शादी की और उसके बाद सपरिवार यूके शिफ्ट हो गईं। मलाला एक सफल लेखक के साथ साथ महिला अधिकार, बाल अधिकार और मानव अधिकार कार्यकर्ता के रूप में लोगों की प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। 


Malala day का महत्त्व एवं प्रासंगिकता-

Malala day के बहाने हम  लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता, समानता, शिक्षा जैसे मूलभूत मानव अधिकारों की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों के बारे में बात करते हैं। साथ ही मूलभूत मानव अधिकारों तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर और राज्य के स्तर पर बदलाव की रूपरेखा भी बना सकते हैं। जिससे प्राकृतिक सार्वभौमिक मानवाधिकार की दिशा में संयुक्त राष्ट्र के ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स’ और देश के संविधान में निहित मूलभूत सिद्धांतों व अधिकारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सटीक कदम उठाए जा सकते हैं। तभी कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को स्थापित किया जा सकता है।


© प्रीति खरवार 

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