अंधेर नगरी नाटक के प्रश्नोत्तर

भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा रचित अंधेर नगरी नाटक के प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. भारतेन्दु हरिश्चंद्र का जन्म कब हुआ था?

उत्तर- भारतेन्दु हरिश्चंद्र का जन्म 9 सितंबर 1850 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था जबकि उनका निधन महज 34 वर्ष की उम्र में 6 जनवरी 1885 को हो गया था।

 

प्रश्न 2. हिंदी नाटकों का जनक किसे माना जाता है?

उत्तर- भारतेन्दु हरिश्चंद्र को ।

 

प्रश्न 3. आधुनिक हिंदी के पिता कौन कहलाते हैं?

उत्तर- भारतेन्दु हरिश्चंद्र ।

 

प्रश्न 4. भारतेन्दु हरिश्चंद्र के माता-पिता का नाम बताओ।

उत्तर- भारतेंदु हरिश्चंद्र की माता का नाम पार्वती देवी और पिता का नाम गोपाल चंद्र था।

 

प्रश्न 5. भारतेंदु हरिश्चंद्र ने किस कृति को हिंदी का पहला नाटक माना?

उत्तर- भारतेंदु ने “नहुष” नाटक को हिंदी का पहला नाटक माना जो गोपालदास (गिरिधर दास) द्वारा रचित था। गोपालदास भारतेंदु के पिता थे और गिरधरराय के नाम से लेखन करते थे।

 

प्रश्न 6. भारतेंदु द्वारा लिखित मौलिक नाटकों के नाम लिखें।

उत्तर- अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा, नील देवी, प्रेम जोगिनी, वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, श्री चंद्रावली, सती प्रताप और भारत जननी इत्यादि।

 

प्रश्न 7. भारतेंदु के अनूदित नाटकों के नाम लिखिए।

उत्तर- विद्या सुंदर, पाखंड विडंबन, धनंजय विजय, कर्पूर मंजरी, दुर्लभ बन्धु।

 

प्रश्न 8. अंधेर नगरी नाटक में कितने अंक और दृश्य हैं?

उत्तर- अंधेर नगरी संस्कृत नाटकों की कसौटी (कम से कम तीन अंक) पर खरा नहीं उतरता। इस नाटक में एक ही अंक है जो कुल 6 दृश्यों के साथ समाप्त हो जाता है।

 

प्रश्न 9. महंत के दोनों शिष्यों के नाम लिखें।

उत्तर- महंत के दोनों शिष्यों के नाम नारायण दास और गोवर्धन दास हैं।

 

प्रश्न 10. महंत के दोनों शिष्य भिक्षा लेने के लिए क्रमशः किन दिशाओं में गए?

उत्तर- नारायण दास पूर्व और गोवर्धन दास पश्चिम दिशा में भिक्षा लेने के लिए गए।

 

प्रश्न 11. किस नगरी में सभी वस्तुएं टके सेर में बेची जा रही थीं?

उत्तर- अंधेर नगरी में।

 

प्रश्न 12. गुरुजी अंधेर नगरी से क्यों चले जाते हैं?

उत्तर- गुरुजी जब देखते हैं कि अंधेर नगरी में हर वस्तु टके सेर मिलती है तो वे वहां नहीं रहना चाहते हैं क्योंकि उनके अनुसार, जहां पर सफेद रंग की वजह से कपास और कपूर को एक समझा जाए, काले रंग के कारण कोयल और कौवे में कोई भेद न किया जाए, वहां पर रहने से तो इंसान के जीवन में हमेशा कष्ट बना रहता है और उसके प्राण हमेशा संकट में रहते हैं।

 

प्रश्न 13. गोवर्धन दास को राजा के प्यादे क्यों पकड़ लेते हैं?

उत्तर- कोतवाल को फांसी देने के लिए बनाया गया फांसी का फंदा कोतवाल की गर्दन के नाप से बड़ा था और गोवर्धन दास की गर्दन उस फंदे की नाप के हिसाब से मोटी थी। दूसरी बात, वह कहीं और का निवासी होने के कारण चौपट राजा को बुद्धिमत्तापूर्ण जवाब नहीं दे पाता (जिससे कोई नयी मुसीबत पैदा नहीं पाती)। तीसरी बात,अंधेर नगरी में संत-महात्माओं के लिए कोई जगह नहीं थी। इन सभी बातों की वजह से प्यादे गोवर्धन दास को पकड़कर फांसी के लिए ले जा रहे थे।

 

प्रश्न 14. गुरु जी ने गोवर्धन दास को फांसी से बचाने के लिए क्या स्वांग रचा?

उत्तर- गुरुजी ने फांसी पर चढ़ने के लिए जिद करके सबके सामने यह प्रचारित किया कि इस शुभ मुहूर्त में जो भी मरेगा, वह सीधा बैकुंठ (मोक्ष) को प्राप्त होगा। यह सुनकर कोतवाल, मंत्री और राजा सभी फांसी के लिए जिद करने लगे।

 

प्रश्न 15. अंततः फांसी पर कौन चढ़ा?

उत्तर- चौपट राजा ।

 

प्रश्न 16. अंधेर नगरी नाटक किसका है?

उत्तर- भारतेंदु हरिश्चंद्र का।

 

प्रश्न 17. अंधेर नगरी नाटक में कितने अंक हैं?

उत्तर- अंधेर नगरी नाटक में सिर्फ एक अंक हैं।

 

© डॉ. संजू सदानीरा

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Dr. Sanju Sadaneera

डॉ. संजू सदानीरा प्रतिष्ठित मोहता पीजी कॉलेज में प्रोफेसर और हिंदी साहित्य विभाग की प्रमुख हैं। इन्हें अकादमिक क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का समर्पित कार्यानुभव है। हिन्दी, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान विषयों में परास्नातक डॉ. संजू सदानीरा ने हिंदी साहित्य में नेट, जेआरएफ सहित अमृता प्रीतम और कृष्णा सोबती के उपन्यासों पर शोध कार्य किया है। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के स्नातक के पाठ्यक्रम के लिए इनकी किताबें विशेष उपयोगी हैं। ये "Dr. Sanju Sadaneera" यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी शिक्षा के प्रसार एवं सकारात्मक सामाजिक बदलाव हेतु सक्रिय हैं।

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