करहा लंब कराड़िआ…….तिण लाखीणा पन्न पद की व्याख्या
करहा लंब कराड़िआ, बे-बे अंगुल कन्न।
राति ज चीन्हो वेलड़ी, तिण लाखीणा पन्न
प्रसंग
प्रस्तुत पद ढोला मारू रा दूहा नामक प्रसिद्ध राजस्थानी प्रेम काव्य से लिया गया है। इसके रचयिता कवि कल्लोल माने जाते हैं।
सन्दर्भ
ढोला अपनी पत्नी को लेने मालवा से राजस्थान आया हुआ है, उसकी सवारी ऊंट है। इस लंबी यात्रा के दौरान रास्ते भर दोनों के बीच बातचीत लगातार चलती रहती है। इसी क्रम में होने वाली उनकी बातचीत का चित्रण इस पद में हुआ है।
व्याख्या
ढोला ऊंट से कहता है कि हे लंबी गर्दन वाले ऊंट! तुम्हारे कान दो-दो अंगुल भर के हैं। आगे ऊंट ढोला से कहता है कि रात में जो लता उसने पहचानी (देखी) थी वह बहुत (बहुमूल्य) स्वादिष्ट थी।
विशेष
1.ढोला और ऊंट की बातचीत दो अभिन्न मित्रों में होने वाली अनौपचारिक बातचीत की तरह लगती है।
2. ऊंट के लिए पत्तों के बहुमूल्य होने का मतलब है बहुत स्वादिष्ट होना।
3. राजस्थानी भाषा का प्रयोग हुआ है।
4. वार्तालाप शैली की रोचकता देखी जा सकती है।
© डॉ. संजू सदानीरा



