आवाज़ का नीलाम एकांकी पर प्रश्नोत्तरी

आवाज़ का नीलाम एकांकी पर प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1. धर्मवीर भारती के एकांकी संकलन का नाम क्या है?

उत्तर. नयी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि धर्मवीर भारती के एकमात्र एकांकी संग्रह का नाम ‘नदी प्यासी थी‘ है। इस संग्रह में नदी प्यासी थी, नीली झील, आवाज़ का नीलाम, संगमरमर की एक रात और सृष्टि का आखिरी आदमी जैसे पांच एकांकी संकलित हैं। इसके अतिरिक्त इनके दो उपन्यास बहुचर्चित हैं – सूरज का सातवां घोड़ा और गुनाहों का देवतासात गीत वर्ष, ठंडा लोहा और कनुप्रिया इनकी काव्य कृतियों के नाम हैं।

प्रश्न 2. आवाज़ का नीलाम किस विधा की रचना है?

उत्तर- एकांकी विधा

प्रश्न 3. आवाज़ का नीलाम एकांकी किस की रचना है?

उत्तर- आवाज़ का नीलाम एकांकी धर्मवीर भारती द्वारा रचित है।

प्रश्न 4. आवाज़ का नीलाम एकांकी में आवाज़ किसका नाम है?

उत्तर- अखबार/दैनिक समाचार पत्र का

प्रश्न 5. आवाज़ का नीलाम एकांकी के मुख्य पात्रों के नाम बताइए।

उत्तर- दिवाकर और बाजोरिया

प्रश्न 6. दिवाकर कौन था?

उत्तर- दिवाकर आवाज़ का नीलाम एकांकी का मुख्य पात्र और आवाज़ का नीलाम नामक समाचार पत्र का संपादक था।

प्रश्न 7. दिवाकर किस प्रकार का आदमी था?

उत्तर- दिवाकर दीवानगी की हद तक ईमानदार एवं सिद्धांतप्रिय व्यक्ति था, जिसने ईमानदारी के कारण अपनी पत्नी की ज़िंदगी तक दांव पर लगा दी थी।

प्रश्न 8. दिवाकर अपना समाचार पत्र बेचने को मजबूर क्यों हो जाता है?

उत्तर- दिवाकर की पत्नी गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होती है और उसको ठीक करने के लिए महंगी दवाइयों की ज़रूरत पड़ती है। दिवाकर की ईमानदारी के कारण उसके पास पैसों का अभाव है अपनी पत्नी को ठीक करने के लिए पैसों की ज़रूरत के कारण वह अपना समाचार पत्र बेचना चाहता है।

प्रश्न 9. उसका अखबार (मालिकाना हक़) कौन खरीदना चाहता है?

उत्तर- भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ सेठ बाजोरिया दिवाकर का अख़बार खरीद कर उसे अपने मन मुताबिक चलाना चाहता है।

प्रश्न 10. आवाज़ का नीलाम एकांकी की मूल संवेदना स्पष्ट करें।

उत्तर- यह एकांकी बताती है कि सच्चाई की कीमत इंसान को अपनी जान गंवा कर भी चुकानी पड़ती है। ईमानदारी एक महंगा शौक है जिसे हर कोई अफोर्ड नहीं कर सकता। सत्ता की चापलूसी करने वाले लोग बड़े व्यापारी बनते हैं, महंगी गाड़ियों में घूमते हैं जबकि जनता की आवाज़ उठाने वाले पत्रकार को कदम-कदम पर परीक्षा देनी पड़ती है।

© डॉ. संजू सदानीरा 

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Dr. Sanju Sadaneera

डॉ. संजू सदानीरा प्रतिष्ठित मोहता पीजी कॉलेज में प्रोफेसर और हिंदी साहित्य विभाग की प्रमुख हैं। इन्हें अकादमिक क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का समर्पित कार्यानुभव है। हिन्दी, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान विषयों में परास्नातक डॉ. संजू सदानीरा ने हिंदी साहित्य में नेट, जेआरएफ सहित अमृता प्रीतम और कृष्णा सोबती के उपन्यासों पर शोध कार्य किया है। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के स्नातक के पाठ्यक्रम के लिए इनकी किताबें विशेष उपयोगी हैं। ये "Dr. Sanju Sadaneera" यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी शिक्षा के प्रसार एवं सकारात्मक सामाजिक बदलाव हेतु सक्रिय हैं।

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