कबिरा खड़ा बजार में नाटक पर प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. कबिरा खड़ा बजार में नाटक के रचयिता का नाम बताएं।
उत्तर- भीष्म साहनी।
प्रश्न 2. कबिरा खड़ा बजार में नाटक कितने अंक में विभाजित किया गया है?
उत्तर- 3 अंकों में ।
प्रश्न 3. कबिरा खड़ा बजार में नाटक का उद्देश्य बताएं।
उत्तर- कबीर के जीवन और विचारों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों, जातिवाद, अंधविश्वास, पाखंड और धर्म के ठेकेदारों पर प्रश्न किया गया है। इसमें कबीर के जीवन की प्रमुख घटनाओं को चुना गया है। उनका सामाजिक संघर्ष, धर्मगुरुओं से टकराव, जनता में प्रभाव और मृत्यु के बाद विवाद कथा में नाटकीयता और प्रत्येक दृश्य को मंच पर सहजता से प्रस्तुत करके किया है।
प्रश्न 4. कबिरा खड़ा बजार में नाटक का सन्देश बताएं।
उत्तर- इस नाटक का प्रमुख संदेश है कि धर्म का असली स्वरूप मानवता और समानता है न कि कर्मकांड। सत्ता और धर्म गुरुओं का गठजोड़ सदैव शोषण करता है। सत्य और प्रेम की शक्ति अंततः सबसे बड़ी होती है। कबीर जैसे मनुष्य हमें यह सिखाते हैं कि मनुष्य की पहचान उसके कर्म और आचरण से है, जाति-धर्म से नहीं।
प्रश्न 5. हिंदी नाटक के इतिहास में कबिरा खड़ा बजार में नाटक का महत्त्व बताएं।
उत्तर- यह नाटक हिंदी नाटक में ऐतिहासिक जीवनीपरक नाटकों की परंपरा को सुदृढ़ करता है। संत कबीर के माध्यम से आधुनिक समाज की समस्याओं पर प्रहार करके समाज को मानवोन्मुखी बनाया गया है। भीष्म साहनी ने इसे मंचीय दृष्टि से जीवंत बनाया है। इसमें लोक भाषा की ताज़गी देखी जा सकती है। साथ ही इसमें कबीर के दोहों और नाटकीय स्थितियों का अद्भुत मेल है। यह नाटक हिंदी में सामाजिक-यथार्थवादी नाटकों की धारा का प्रतिनिधित्व करता है।
इसे क्लासिक हिंदी नाटकों की कोटि में रखा जाता है। ठीक उसी प्रकार जैसे मोहन राकेश का “आषाढ़ का एक दिन” और धर्मवीर भारती का “अंधा युग”। इसका सबसे बड़ा महत्त्व यह है कि यह दर्शकों को सिर्फ़ अतीत ही नहीं दिखाता बल्कि वर्तमान समाज पर भी सवाल खड़े करता है।
प्रश्न 6. रंगमंचीय तत्त्वों के आधार पर कबिरा खड़ा बजार में नाटक की समीक्षा करें।
उत्तर- कबिरा खड़ा बजार में नाटक तात्विक दृष्टि से सफल है। परंपरागत रूप से इसमें तीन अंक रखे गये हैं। सभी अंकों में दृश्य विधान पर्याप्त पूर्व सूचना के साथ आता है। नाटक के संवाद संक्षिप्त, रोचक और तर्कसंगत हैं। नाटक का मंचन किया जा सकता है क्योंकि रंगमंचीय दिशा निर्देश पूरी तरह से दिये गये हैं। नाटकीय तत्त्वों के आधार पर यह पूर्णतः सफल नाटक है।
© डॉ. संजू सदानीरा



