स्ट्रेस (stress) कम करने के 10 आसान और असरदार तरीके

स्ट्रेस (stress) कम करने के 10 आसान और असरदार तरीके (stress management in hindi)

 

स्ट्रेस (stress) आज हम सभी की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बच्चों से लेकर वयस्कों तक यह सब की ज़िंदगी में दखल दे चुका है। पढ़ाई, कॅरियर हो या रिश्तों की उलझन या फिर क्लाइमेट चेंज की वजह से होने वाले बदलाव ये सभी हमारे मेंटल हेल्थ पर असर डालते हैं। Gallup Global Emotions Survey 2024 के अनुसार, दुनिया भर में 37 फीसद वयस्क रोजाना स्ट्रेस से गुज़रते हैं। इसके अलावा कई सारे इंटरनेशनल स्टडीज में भी पाया गया है कि 60 से 74 फीसद लोगों ने पिछले 1 साल में कभी ना कभी स्ट्रेस को महसूस किया है।

American Psychological Association (APA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक स्ट्रेस होने से व्यक्ति में एंजायटी, डिप्रेशन, हार्ट डिजीज और दूसरी अनेक बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। दरअसल स्ट्रेस हमारे इम्यूनिटी को कमज़ोर करता है, जिस वजह से व्यक्ति बीमारियों की गिरफ्त में आसानी से आ जाता है। काम का भारी दबाव, आर्थिक अनिश्चितताएं, घर परिवार की ज़िम्मेदारियां और ज़्यादा स्क्रीन टाइम सब मिलकर हमारी सेहत पर गंभीर रूप से असर डाल रहे हैं। जिसका सबसे आम असर स्ट्रेस के रूप में देखने को मिलता है। स्ट्रेस अपने आप में कोई ख़तरनाक बीमारी नहीं है लेकिन यह बहुत सारी ख़तरनाक बीमारियों की वजह बन सकता है।

 

स्ट्रेस (stress) क्या है?

स्ट्रेस एक ऐसी मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रतिक्रिया है जो व्यक्ति को किसी चुनौती, दबाव या ख़तरे का एहसास होने पर अपने आप होती है। World Health Organization के अनुसार स्ट्रेस तब पैदा होता है जब परिस्थितियां हमारी क्षमताओं और संसाधनों के पहुंच से बाहर हो जाती हैं। यानी ऐसी स्थिति जिसका सामना हम मौजूदा संसाधनों और क्षमताओं के सहारे नहीं कर सकते हैं।

American Psychological Association स्ट्रेस को “fight-or-flight” रिस्पॉन्स के रूप में परिभाषित करता है। जिसमें शरीर स्ट्रेस हार्मोन यानी कॉर्टिसोल की रिलीज को बढ़ा देता है। जिस वजह से दिल की धड़कन बढ़ जाती है, ब्लड प्रेशर कम या ज़्यादा हो सकता है, साथ ही मसल्स में टेंशन भी बढ़ जा सकती है। इस तरह से देखा जाए तो स्ट्रेस शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया है जो किसी अनजानी या अनचाही स्थिति की वजह से पैदा होती है।

क्या स्ट्रेस (stress) हमेशा नेगेटिव होता है?

स्ट्रेस को आमतौर पर नेगेटिव रूप में देखा जाता है जबकि यह हमेशा नेगेटिव हो यह ज़रूरी नहीं है। स्ट्रेस को दो कैटेगरी में बांटा जा सकता है..

1.Eustress

यह मॉडरेट लेवल का स्ट्रेस होता है जो व्यक्ति के मोटिवेशन को बढ़ाता है। जिससे किसी भी काम को करने और उसे लगातार ज़ारी रखने के लिए एनर्जी मिलती है। यह हमारी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने में योगदान देता है। इस तरह से देखा जाए तो यह वह स्ट्रेस है जो हमें प्रेरित करता है और प्रदर्शन को बेहतर बनाने में योगदान देता है इसीलिए इसे good stress भी कहा जाता है। एग्जाम के पहले, नई नौकरी शुरू करने या किसी नए लक्ष्य के पहले का स्ट्रेस इस कैटेगरी में आता है। यह फोकब और एनर्जी को बढ़ाता है। इससे आत्मविश्वास मजबूत होता है, जिससे पर्सनल और प्रोफेशनल ग्रोथ में मदद मिलती है।

2.Distress

Distress एक तरह का नेगेटिव स्ट्रेस है जो हमारी दिनचर्या पर नेगेटिव रूप में असर डालती है। साथ ही यह न सिर्फ़ मानसिक सेहत बल्कि शारीरिक सेहत के लिए भी नुकसानदेह साबित होती है। इस तरह से देखा जाए तो जो स्ट्रेस परफॉर्मेंस और पर्सनल ग्रोथ के लिए नुकसानदेह हो साथ ही यह सेहत पर भी बुरा असर डालेन उसे Distress की कैटेगरी में रखा जा सकता है।

World Health Organization के अनुसार जब स्ट्रेस लंबे समय तक लगातार बना रहता है वह व्यक्ति उसे मैनेज नहीं कर पता है तो यह सेहत के लिए बहुत ज़्यादा ख़तरनाक साबित होता है। इससे एंजायटी, डिप्रेशन और नींद न आने जैसी समस्याएं बढ़ती हैं जो लंबे समय में जाकर लाइफ़स्टाइल डिजीज और दूसरी क्रॉनिक बीमारियों का रिस्क बढ़ाती हैं।

 

स्ट्रेस (stress) कम करने के 10 आसान तरीके (Research-backed)

स्ट्रेस व्यक्ति के अंदर होने वाला एक नेचुरल प्रोसेस है जो किसी अनचाही या मुश्किल परिस्थिति से डील करने के लिए ज़रूरी होता है। यह मोटिवेशन को बनाए रखने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में फ़ायदेमंद होता है। लेकिन जब यह लंबे समय तक, लगातार और ज़्यादा इंटेंसिटी में होता है तो यह सेहत के लिए ख़तरनाक हो जाता है। इससे इम्यूनिटी कम होती है जो बीमारियों से लड़ने के लिए ज़रूरी होती है। इसके साथ ही स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल मेंटल हेल्थ के लिए भी नुकसानदेह साबित होता है। सही और सेहतमंद ज़िंदगी के लिए स्ट्रेस को कंट्रोल में रखना ज़रूरी होता है। इसके लिए कुछ रिसर्च बेस्ड तकनीक हैं जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है…

1. मेडिटेशन और रिलैक्सेशन

Harvard Medical School की एक रिसर्च में पाया गया है कि नियमित तौर पर मेडिटेशन करने से ब्रेन के स्ट्रक्चर में पॉजिटिव बदलाव नजर आता है जो स्ट्रेस लेवल को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए रोजाना कुछ समय के लिए ख़ुद को हर तरह के डिस्ट्रक्शन से फ्री करके मेडिटेशन करना स्ट्रेस को कंट्रोल करने के लिए एक कारगर कदम साबित हो सकता है।

2. वॉक, एक्सरसाइज या दूसरी शारीरिक गतिविधियां

Mayo Clinic के अनुसार एक्सरसाइज करने से शरीर में एंडोर्फिन नामक हार्मोन रिलीज होता है। गौरतलब है कि एंडोर्फिन हॉर्मोन को हैप्पी हॉर्मोन भी कहा जाता है क्योंकि इससे मूड बेहतर होता है। इसलिए वॉक एक्सरसाइज या दूसरी शारीरिक गतिविधियां जैसे कि स्ट्रेचिंग, आउटडोर गेम्स, डांस, एरोबिक्स या स्विमिंग स्ट्रेस कम करने में काफ़ी मददगार साबित होते हैं।

3. अपने विचार लिखें (Journaling)

University of Texas की एक स्टडी में पाया गया है कि अपने विचारों को लिखने से इमोशनल क्लैरिटी बढ़ती है जो स्ट्रेस कम करने में मददगार होता है। इसलिए जब भी ओवर थिंकिंग चले या किसी बात को लेकर स्ट्रेस हो तो उन्हें कागज पर लिख देना बेहतर होता है। कई बार लिखते लिखते ख़ुद ही समाधान भी सूझ जाता है। लिखना तब भी फ़ायदेमंद होता है जब कोई ऐसी बात हो जो हम किसी और से शेयर करने में हिचकते हों या डरते हों।

4. पूरी नींद लें

अच्छी नींद अच्छे मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बेहद ज़रूरी होती है। National Sleep Foundation के अनुसार, रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने से हॉर्मोनल बैलेंस बना रहता है। यानी स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसोल और एंडोर्फिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स के बीच बैलेंस बने रहने से मेंटल हेल्थ ठीक रहता है और स्ट्रेस हावी नहीं होने पाता है।

अगर आपको नींद आने में दिक्कत होती है तो यहां उसको ठीक करने के उपाय जान सकते हैं…

https://www.duniyahindime.com/insomnia-neend-na-aane-ki-samasya-upay/

 

5. स्क्रीन टाइम कम करें

रिसर्च बताती है की ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से FOMO, एंजायटी और कंपैरिजन स्ट्रेस बढ़ता है। ख़ास तौर पर युवाओं में यह ज़्यादा देखा गया है कि वह दूसरों की ऑनलाइन ज़िंदगी से अपनी तुलना करके स्ट्रेस में आ जाते हैं। इसके अलावा फ़िल्में, वेब सीरीज और ड्रामा हमें हक़ीक़त से दूर सपनों की दुनिया में ले जाते हैं। फिर इस तरह की एक आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया के बीच संघर्ष शुरू हो जाता है जो आगे चलकर स्ट्रेस की वजह बन सकता है। इसलिए स्क्रीन टाइम करके स्ट्रेस मैनेज करना आसान हो जाता है।

6. किसी अपने से बात करें

किसी भी तरह के स्ट्रेस की सिचुएशन में होने पर अपनों का साथ बहुत बड़ी राहत दे सकताहै। अपने करीबी लोगों से भावनाएं शेयर करना ऑक्सीटोसिन हार्मोन को बढ़ाता है जो स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। कई बार ऐसा होता है कि जिस वजह से स्ट्रेस हो रहा है उसका समाधान भी बात करने से निकल आता है। इसके अलावा जब ऐसा लगता है कि किसी भी परिस्थिति में कोई हमारे साथ खड़ा है तो इससे राहत मिलती है जो स्ट्रेस को कम करता है।

7. मनपसंद काम करें

स्ट्रेसफुल सिचुएशंस में होने पर अपना पसंदीदा काम या हॉबी को समय देना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। किताबें पढ़ने, गाने सुनने, पसंद का खाना बनाने या गार्डनिंग करने से कॉर्टिसोल लेवल कम होता है। म्यूजिक थेरेपी पर तो काफी रिसर्च हो चुका है, जिसमें यह साबित हो चुका है कि इससे स्ट्रेस कम होता है। मनपसंद काम स्ट्रेस को दूर भगाने में बेहद कारगर साबित होता है।

8. हेल्दी डाइट लें

एक कहावत है “जैसा खाए अन्न, वैसा बने मन” यानी हम जिस प्रकार का भोजन करते हैं वह हमारे शरीर और मन दोनों पर असर डालता है। अक्सर लोग स्ट्रेस होने पर बिना कुछ सोचे समझे जंक फूड खाने लगते हैं। कई बार खुद को अच्छा फील करने के लिए इस तरह का खाना खाते हैं। यह थोड़ी देर के लिए तो अच्छा महसूस करा सकता है लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे फायदे की जगह नुकसान ज़्यादा होता है। World Health Organization के अनुसार बैलेंस्ड डाइट मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाती है।

9. टाइम मैनेजमेंट सीखें

कई बार काम ज़्यादा रहता है और समय कम, इस वजह से स्ट्रेस हावी हो जाता है। ऐसी स्थिति में टाइम मैनेजमेंट एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है। अपने ज़रूरी, कम ज़रूरी और ग़ैर ज़रूरी कामों की लिस्ट बनाएं। प्राथमिकता के अनुसार इन्हें एक क्रम में रखें। इसके बाद टाइम मैनेजमेंट की तकनीक को अपना कर स्टेप बाय स्टेप उन्हें पूरा करें। जिन लोगों की प्लानिंग अच्छी होती है उनमें स्ट्रेस लेवल अपेक्षाकृत कम होता है।

10. खुद को समय दें (Self-care)

हमें हमेशा यह सिखाया जाता है कि दूसरों के लिए जियो। जबकि जो सिर्फ़ दूसरों को ख़ुश करने में खुद को भूल जाता है वह न तो ख़ुद को ख़ुश रख पाता है न ही दूसरों को। क्योंकि जो चीज (ख़ुशी) हमारे पास है ही नहीं वह हम दूसरों को कैसे दे सकते हैं? हमें यह समझना पड़ेगा कि ख़ुद को समय देना, ख़ुद से प्यार करना और प्राथमिकता देना कोई ग़लत चीज नहीं है बल्कि यह हमारे सुखी जीवन के लिए बेहद ज़रूरी है। सेल्फ केयर और सेल्फ लव स्ट्रेस को कम करने के लिए ज़रूरी कदम हैं।

स्ट्रेस (stress) हर बार बुरा नहीं होता, बल्कि मॉडरेट लेवल का स्ट्रेस (Eustress) हमारे ग्रोथ के लिए एक फ्यूल की तरह काम करता है। वहीं Distress कुछ समय रहते पहचान कर मैनेज करना ज़रूरी है। इसका बैलेंस बनकर ही हमें स्ट्रेस को अपने ग्रोथ के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि जब स्ट्रेस खुद से मैनेज न हो सके और यह आपकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर बुरी तरह असर डालने लगे। ऐसे में आपको प्रोफेशनल मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की मदद लेना ज़रूरी हो जाता है और इसमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए।

FAQs

Q1. स्ट्रेस कम करने का सबसे तेज तरीका क्या है?

A: गहरी सांस लेना (Deep Breathing) — कुछ मिनटों में असर दिखता है।

Q2. योग स्ट्रेस के लिए कितना असरदार है?

A: बहुत! अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और योग निद्रा बेहद उपयोगी हैं।

Q3. क्या डाइट से स्ट्रेस प्रभावित होता है?

A: हां, चीनी और कैफीन ज्यादा लेने से बढ़ता है।

Q4. कितने समय में फायदा दिखेगा?

A: 7-14 दिनों में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगते हैं।

 

(नोट: यह सामान्य सलाह है। गंभीर समस्या में चिकित्सकीय परामर्श लें।)

 

© प्रीति खरवार

स्रोत:

https://www.who.int/news-room/questions-and-answers/item/stress

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK541120/

 

Priti Kharwar

प्रीति खरवार एक Freelance Writer हैं, जो शोध-आधारित हिंदी-लेखन में विशेषज्ञता रखती हैं। Banaras Hindu University से Psychology में Masters प्रीति को हिन्दी भाषा में लेखन के लिए भाषा सारथी सम्मान और United Nations Population Fund की तरफ से Laadli Media Fellowship भी मिल चुका है। प्रीति का लक्ष्य हिंदी भाषी पाठकों को Mental health और सामाजिक मुद्दों पर आसान और बोलचाल की भाषा में कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे लोग अपने जीवन में positive change ला सकें।

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