अमरजोत एकांकी की मूल संवेदना

अमरजोत एकांकी की मूल संवेदना 

 

अमरजोत एकांकी डॉ लक्ष्मी नारायण रंगा द्वारा रचित एक प्रसिद्ध एकांकी है। चूंकि रंगा साहब राजस्थान में ही (बीकानेर में) जन्मे, इसलिए हृदय की गहराई तक राजस्थानी भावों व पराक्रम की गाथाओं के प्रति सम्मान के भाव से भरे हुए थे। उनके द्वारा रचित अमरजोत एकांकी में भी राजस्थानी वीरों के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदानों का सचिव चित्रण किया गया है।

 

अमरजोत एकांकी में निम्न विचारों की सुंदर अभिव्यक्ति की गई है–

 

1. बारहठ परिवार के योगदान को रेखांकित करना-

देश की आज़ादी की लडाई में सभी प्रांतों के वीर जवानों का बराबर योगदान था। इन वीर जवानों में देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले राजस्थान के बारहठ परिवार का योगदान स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। केसरी सिंह बारहठ, जोरावर सिंह बारहठ, प्रताप सिंह बारहठ, ईश्वर सिंह आसिया इत्यादि ने अपना लहू बहाकर अंग्रेजों से आज़ादी की लडाई में प्राणपण से लोहा लिया। लक्ष्मीनारायण रंगा ने इन योगदानों की गाथा को अपने अमरजोत एकांकी में रेखांकित किया है।

 

2. अंग्रेजों की कूटनीति-

अंग्रेजों ने लगभग 200 साल तक इस देश पर राज किया। ‘फूट डालो राज़ करो’ उनकी नीति थी। वह सभी देशवासियों के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानियों को भी अपनी इस नीति का शिकार बना लेते थे। इसका भी एकांकी में अच्छा खुलासा किया गया है।

 

3. देशभक्ति की शक्ति, सामर्थ्य और समझदारी का चित्रण-

अंग्रेजों की तमाम कूटनीति के बावजूद भी सच्चे वीर अपने साथियों के भेद नहीं बताते थे। वह स्वयं अपनी समझदारी से अंग्रेजों को अक्सर चकमा देने में सफ़ल हो जाते थे।

 

4. औरों को माध्यम बनाना-

अपने ग़लत उद्देश्यों में सफ़ल होने के लिए अंग्रेज़ कई प्रकार के मोहरों का सहारा लिया करते थे। एकांकी का सिपाही भी ऐसा ही एक मोहरा था।

 

5. राष्ट्रभक्तों की हाज़िरजवाबी-

राष्ट्रभक्त न सिर्फ़ वीर होते थे, वरन हाज़िरजवाबी में भी माहिर होते थे, जिससे अंग्रेजों को भी निरुत्तर कर देते थे।

 

6. प्रलोभन का चारा फेंकने की नीति पर प्रकाश-

अंग्रेज़ अपनी बात मनवाने के लिए छल, बल, दल सभी नीतियों का सहारा लेते थे। रिश्तेदारों की रिहाई, अच्छे इनाम का आकर्षण,नौकरी का प्रलोभन-जो बन पड़ता वैसा लालच देते थे। एकांकीकार ने इस ओर भी इशारा किया है।

 

7. अंतिम हथियार यातना-

अंग्रेज़ों की दमनकारी नीतियों पर भी एकांकीकार ने प्रकाश डाला है। अंग्रेज़ों द्वारा आज़ादी के दीवानों को दी जाने वाली यातनाओं के जो भयानक दृश्य इस एकांकी में दिखाए गए हैं,वे झकझोर डालते हैं।


8. मातृभूमि और उससे जुड़ी हर चीज के प्रति प्रेम-

इस एकांकी में अपनी धरती,अपने रीति-रिवाज, रंग,त्योहार सबके प्रति जुड़ाव दिखाया गया है।

 

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि लक्ष्मीनारायण रंगा ने अमरजोत एकांकी के माध्यम से आज़ादी के अमर परवानों की अमर गाथा को वर्णित किया है। अपने एकांकी लेखन में सकारात्मक विषय चयन के लिए भी वे धन्यवाद के पात्र हैं। यही उनकी स्वयं की कीर्ति का स्रोत भी है।

 

© डॉ. संजू सदानीरा

अगर आप अज्ञेय की कहानी शरणदाता के बारे में पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं..

 

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