” जो तुम आ जाते एक बार ” कविता: महादेवी वर्मा

 महादेवी वर्मा-” जो तुम आ जाते एक बार ” कविता का भावार्थ।

अथवा

 “जो तुम आ जाते एक बार” कविता में महादेवी किसको संबोधित कर रही हैं?


यह कविता छायावाद की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा द्वारा रचित है। मुख्यत: यह एक आमंत्रण गीत अथवा प्रणय गीत है।इस प्रेम गीत के माध्यम से उन्होंने उस अज्ञात,अनंत,अदृश्य,अनिवर्चनीय  प्रियतम को याद किया है,जिसको वे अपने जीवन का केन्द्र बिंदु मानती हैं। कुछ समीक्षक उसे प्रियतम के स्थान पर परमात्मा को रखकर महादेवी की कविता में आध्यात्मिक रहस्यवाद भी ढूंढते हैं। कदाचित वे भी अपनी जगह ग़लत नहीं हैं क्योंकि मानसिक रूप से हम इस बात के लिए आज तक परिपक्व नहीं हैं कि एक स्त्री प्रेम विह्वल होकर अपने प्रणयी को पुकार रही है.हालांकि महादेवी एक सजग और जाग्रत स्त्री हैं,प्रणयी उनके जीवन में नहीं थे,वे अपना जीवन सफलतापूर्वक जी रही हैं। इस सफलता के बावजूद एक साथी की कमी से उपजा दर्द और एकांत का भाव इस कविता में महसूस किया जा सकता है। कवयित्री कहती हैं कि अगर प्रेमी या प्रियपात्र का सानिध्य उन्हें प्राप्त हो जाए तो उनके जीवन से शुष्कता दूर होकर उसके स्थान पर कोमलता आ जाएगी,विश्व के प्रति उनकी दृष्टि तनिक और मैत्रीपूर्ण हो जाएगी।

महादेवी कहती हैं कि उस प्रियतम के  आने की राह में जो कांटे हैं, उन्हें बीन कर पथ को कंटकहीन कर देती! वहाँ पराग कण बिछ जाते! उसके आगमन से ह्रदय मे जो प्यार उमड़ा है,आँखो से आँसू इस तरह बह रहे हैं,जिस तरह सागर मे कोई झरना बह रहा हो।उसके  आने से होठों पर वह हँसी आ जाती है, जिससे मन में आये सारे विकार धुल जाते हैं। 

महादेवी कहती हैं,प्रियतम के आने से प्रकृति में चारो ओर बंसत की हरियाली छा जाती है, वातावरण खिल जाता है। जीवन से वैराग्य ख़त्म हो जाएगा। कवयित्री अपने प्रिय पर जीवन की सारी खुशियाँ न्योछावर कर देने को आतुर हैं.जीवन भर का संचित कोश वो अपने प्रणयी पर जमा किया लुटा देने को तत्पर है।

इस कविता के माध्यम से कुछ समीक्षकों के अनुसार महादेवी जी ने परमात्मा का आह्वान किया है तो दूसरी तरफ़ डॉ. बच्चन सिंह जैसे आलोचकों के अनुसार यह महादेवी के एकाकी मन से निकली प्रणय कविता है. ये अवश्य है कि महादेवी जी ने इस कविता के माध्यम से भी अपने जीवन के वैराग्य,दुःख,पीड़ा एकांत इत्यादि के बारे में उल्लेख किया है, लेकिन इसके साथ इस कविता में प्रतीक्षा और प्रेम की उत्कंठा अलग से देखी जा सकती है।


-डॉक्टर संजू सदानीरा

विभागाध्यक्ष हिंदी साहित्य

मोहता पीजी कॉलेज

सादुलपुर, चूरू, राजस्थान

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