राष्ट्रीय मतदाता दिवस : National Voter’s day in Hindi

 

राष्ट्रीय मतदाता दिवस : National Voter’s day


किसी भी देश को चलाने के लिए एक निश्चित व्यवस्था या तंत्र की आवश्यकता होती है। यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है- लोकतंत्र और राजतंत्र। लोकतंत्र में देश का संवैधानिक मुखिया देश की जनता के द्वारा चुना जाता है,जबकि राजतंत्र में शासक वंशानुगत होता है,जो कि पीढ़ी दर पीढ़ी शासन करता रहता है। इस तरह देशों को दो भागों में बांटा जा सकता है- लोकतंत्रात्मक और राजतंत्रात्मक देश। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के गठन के बाद से दुनिया में धीरे-धीरे राजशाही की परंपरा समाप्त की जा रही है,परंतु अभी भी कुछ देशों में संसदीय राजतंत्र चल रहा है। 


संसदीय राजतंत्रात्मक शासन प्रणाली में ब्रिटेन,कनाडा, जापान,बहरीन,कतर और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं। वहीं लोकतांत्रिक देशों में भारत,संयुक्त राज्य अमेरिका,जर्मनी, फ्रांस जैसे देश प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं। इनमें भी जनसंख्या के आधार पर भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाता है। यहां लोकतंत्र का आधार स्तंभ संविधान है। भारत के संविधान ने देश के नागरिकों को अपनी इच्छानुसार सरकार चुनने का अधिकार दिया है। इसी कारण राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र में प्रधानमंत्री चुनने के लिए प्रत्येक 5 वर्ष पर चुनाव आयोजित किये जाते हैं, जिसमें देश के 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति मतदान का प्रयोग करते हैं। मतदान के इसी महत्त्व को देखते हुए प्रतिवर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है।


राष्ट्रीय मतदाता दिवस का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य-

प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को निर्वाचन आयोग के तत्त्वावधान में देशभर में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2011 से हुई,जब तत्कालीन प्रेसिडेंट श्रीमती प्रतिभा सिंह पाटिल ने निर्वाचन आयोग के 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मतदाता दिवस को वार्षिक तौर पर मनाने का फ़ैसला किया। तब से प्रतिवर्ष इसी तिथि को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। ग़ौरतलब है कि संविधान लागू होने के 1 दिन पहले यानी 25 जनवरी 1950 को भारतीय निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई थी इसलिए इस दिन की महत्ता को देखते हुए यह तिथि चुनी गई। इस बार 25 जनवरी 2024 को 14वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जा रहा है। 


भारतीय निर्वाचन आयोग/चुनाव आयोग-

भारतीय निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है,जो देश में केंद्र एवं राज्य स्तर पर होने वाले चुनाव को संचालित करती है। भारतीय निर्वाचन आयोग का सचिवालय नई दिल्ली में स्थित है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 से लेकर 329 तक निर्वाचन आयोग और उसके कार्यों का वर्णन किया गया है। मूल रूप से चुनाव आयोग में केवल एक चुनाव आयुक्त होता था,लेकिन चुनाव आयुक्त संशोधन अधिनियम 1989 पारित होने के बाद इसे एक बहु-सदस्यीय निकाय बना दिया गया है। वर्तमान में इसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त,दो अन्य चुनाव आयुक्त समेत तीन सदस्य हैं। इस समय राजीव कुमार 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और अन्य चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पाण्डेय और अरुण गोयल हैं। इनका कार्यकाल 6 वर्ष अथवा 65 वर्ष की अवस्था (जो पहले हो) तक होती है।


राष्ट्रीय मतदाता दिवस और निर्वाचन आयोग की पहलें-

निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। इस दिन मतदाता को वोट के प्रति जागरुक करने के लिए केंद्र एवं राज्य स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके लिए वोटर आईडी वितरण, हस्ताक्षर अभियान, संकल्प अभियान, भाषण, लेख व निबंध प्रतियोगिताओं इत्यादि का देशभर में आयोजन किया जाता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिये एक लक्षित मतदाता पहुँच पहल (targeted voter outreach initiative) भी शुरू की गई है। TIP का लक्ष्य चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर मतदान प्रतिशत को 70% से आगे ले जाना है। 2009 में निर्वाचन आयोग द्वारा सुव्यवस्थित मतदाता एवं निर्वाचन सहभागिता कार्यक्रम (SVEEP) के माध्यम से भी मतदाता को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया गया था। इसके अलावा वोटर की सुविधा के लिए 2019 में मतदाता हेल्पलाइन ऐप भी लॉन्च किया गया था,जो वोटर आईडी,मतदाता सूची में नाम जैसी तमाम जानकारियां को एक ही जगह पर उपलब्ध कराता है।


राष्ट्रीय मतदाता दिवस की आवश्यकता-

भारत में मतदान के लिए न्यूनतम उम्र सीमा पहले 21 वर्ष थी,जिसे 1988 में हुए 61वें संविधान संशोधन के तहत कम करके 18 वर्ष कर दिया गया। इससे युवा मतदाताओं की संख्या में वृद्धि देखी गई। 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 65% आबादी 35 वर्षीय अथवा इससे कम आयु वर्ग के युवाओं की है लेकिन मतदान करने में युवाओं में अरुचि देखी जा रही है। ध्यातव्य है कि लोकसभा आम चुनाव 2009 में 58%, 2014 में 66.4% और 2019 में 67.6% मतदान हुआ। हालांकि पहली लोकसभा 1951 में मतदान प्रतिशत 45 % था, उस हिसाब से मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी जा रही है। लेकिन सरकार का लक्ष्य 2024 में मतदान को 70% से अधिक पर ले जाना है। इसके लिए निर्वाचन आयोग के पास राष्ट्रीय मतदाता दिवस सबसे अच्छा अवसर साबित हो सकता है।


चुनौतियां एवं संभावनाएं-

भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में जहां साक्षरता दर अब भी महज 77% है। इसमें भी वास्तव में कितने लोग शिक्षित हैं,इसका आकलन कर पाना मुश्किल है। ऐसे में लोगों को मतदान के प्रति जागरुक करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। शिक्षा एवं रोजगार के लिए प्रवास पर गए व्यक्तियों के लिए चुनाव के समय पर आ पाना मुश्किल होता है। इसके अलावा दूरस्थ मतदान केंद्रों में यातायात का उचित प्रबंध न होना, स्थानीय स्तर पर बूथ कैप्चरिंग और गुंडागर्दी चुनाव को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। इसके अलावा विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में ईवीएम के इस्तेमाल के बारे में जानकारी न होने से भी मतदाता का वोट अनचाहे व्यक्ति को चला जाता है। साथ ही निर्वाचन आयोग में सरकार का दख़ल,मेनस्ट्रीम मीडिया मैनेजमेंट और आईटी सेल की सक्रियता मतदान की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रभाव डालते हैं। राष्ट्रीय मतदाता दिवस न सिर्फ मतदाताओं को जागरुक करने बल्कि एक स्वतंत्र,पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। स्वतंत्र निर्वाचन आयोग,निष्पक्ष मीडिया,सतर्क प्रशासन और शिक्षित एवं जागरुक मतदाता मिलकर ही राष्ट्रीय मतदाता दिवस को सार्थक बना सकते हैं जिससे सही मायने में देश में लोकतंत्र की स्थापना संभव है।



© प्रीति खरवार 

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