बाड़े का कुत्ता कहानी की मूल संवेदना/ भावार्थ
बाड़े का कुत्ता मालचंद तिवाड़ी की पशुओं की ज़िंदगी पर आधारित एक अत्यंत मार्मिक कहानी है। मालचंद तिवाड़ी राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार हैं और हिंदी व राजस्थानी में समान रूप से लिख रहे हैं। “बिज्जी का विदा गीत” के लिए इनकी काफ़ी चर्चा होती है।
मालचंद तिवाड़ी का जन्म 1958 ई. में बीकानेर में हुआ था। कविताएं और कहानियां दोनो विधाओं में इन्होंने सफलतापूर्वक लेखन किया। इन्हें अपने लेखन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार और अन्य अनेक सम्मान प्रदान किये गये। मुझसे सवाई सबल, गहरे आकाश में गूंजती और पकने से पहले मेरी नींद इनके महत्त्वपूर्ण काव्य संकलन हैं। सुकांत के सपनों में, पानीदार तथा अन्य कहानियाँ’, ‘जालियाँ और झरोखे’, ‘त्राण तथा अन्य कहानियाँ’ इनके कहानी-संग्रह हैं। राजस्थानी भाषा में इनकी रचनाएं—’भोळावण’ (उपन्यास); ‘धड़न्द’, ‘सेलिब्रेशन’ (कहानी-संग्रह); ‘उतर्यो है आभो’ (कविता-संग्रह)।
बाड़े का कुत्ता देसी नस्ल के एक आम कुत्ते की ख़ास कथा है, जिसे बड़ी ही मनोवैज्ञानिकता और मार्मिकता के साथ तिवाड़ी जी ने प्रस्तुत किया है। कुत्ते के साथ-साथ बच्चों की दिनचर्या और मनोविज्ञान का जिस स्वाभाविकता से चित्रण इस कहानी में किया गया है वह अन्यत्र दुर्लभ है। कैसे एक पिल्ले को मरने से बचाने के लिए एक सूने बाड़े में डाल दिया जाता है, उसके खाने-पीने की व्यवस्था की जाती है, कैसे उसे पुनः बाड़े के बाहर के जीवन से परिचित कराने की कोशिश की जाती है- सभी घटनाओं को मार्मिकता के साथ इस कहानी में प्रस्तुत किया गया है।
कुत्ते का बाड़े से मोह, बाहर की दुनिया से डर बिल्कुल मनोवैज्ञानिक धरातल पर दिखाया गया है। बड़ों की दुनिया कैसे बच्चों की दुनिया से भिन्न है, कैसे बच्चों के प्रश्न बड़ों को विचलित नहीं करते – सभी बिंदु कहानी में बहुत खूबसूरती के साथ व्यक्त हुए हैं। कुत्ते के प्रति पहले सब बच्चों का मोह, फिर मोह टूटना, कथा नायक का कुत्ते के लिए मोह बनते-बिगड़ते रहना इंसानी फितरतों का जीवन्त ताना बाना प्रस्तुत करता है।
कहानीकार ने लगातार कहानी पर पकड़ बनाए रखी है। उन्होंने कुत्ते से जुड़ी तमाम छोटी-बड़ी घटनाएं अत्यंत मनोहारी रूप में प्रस्तुत की हैं। कथा नायक की पुनः उस जगह पर जाते वक्त दिखाई गई व्यग्रता मन को छू जाती है। जिस समय कथानायक को जैकी (कुत्ते) के मरने का समाचार मिलता है- उस समय की उसकी मनोवृति पाठकों को व्यथित कर देती है।
संपूर्ण कहानी में परिवार, समाज, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और इंसानी मनों की सूक्ष्म पड़ताल की गई है। एक कुत्ते के माध्यम से यह कहानी बाल मन और बचपन की सच्ची तस्वीर पेश कर सकने और पाठकों पर अमित छाप छोड़ने में सफल हुई है। इस प्रकार बाड़े का कुत्ता कहानी कुत्ते के छोटे बच्चों के प्रति इंसान के बच्चों का आकर्षण ही व्यक्त नहीं करती बल्कि इस भागती दौड़ती ज़िन्दगी के हज़ार रंग दिखाती है।
© डॉ. संजू सदानीरा
गदल कहानी का सारांश यहां पढ़ सकते हैं..



