Silent Anxiety Symptoms: अंदर से चल रही बेचैनी के संकेत और इससे बाहर निकलने के 7 तरीके

Silent Anxiety Symptoms: अंदर से चल रही बेचैनी के संकेत और इससे बाहर निकलने के 7 तरीके

 

कई लोग बाहर से बिल्कुल नॉर्मल, हंसते-मुस्कुराते और अपनी ज़िम्मेदारियां निभाते दिखाई देते हैं। लेकिन भीतर ही भीतर उनके मन में लगातार तनाव, डर, एंग्जायटी, ओवर थिंकिंग और मानसिक थकान चलती रहती है। यही स्थिति silent anxiety के नाम से जानी जाती है। कभी-कभी एंजायटी पैनिक अटैक, बढ़ी धड़कन या अचानक से रोने जैसे सिम्टम्स के रूप में दिखाई नहीं देती है। लेकिन यह व्यक्ति को अंदर ही अंदर थका देती है।

आज की दबाव भरी ज़िन्दगी में यह समस्या आम होती जा रही है। ख़ासतौर पर स्टूडेंट्स, वर्किंग प्रोफेशनल और इमोशनली सेंसिटिव लोगों में यह स्थिति ज़्यादा देखी जाती है। समस्या तब और बढ़ जाती है जब व्यक्ति ख़ुद भी नहीं समझ पाता कि वह silent anxiety से गुज़र रहा है। ऐसे में वह अपनी परेशानी किसी से शेयर भी नहीं कर पाता है और शेयर करने पर कोई और समझ नहीं पाता क्योंकि इसके सिंप्टम्स छुपे हुए होते हैं। इसमें व्यक्ति अपने डेली रूटीन के काम करता रहता है। लोगों से मिलता जुलता रहता है, लेकिन उसके मन को शायद ही कभी सुकून और आराम मिल पाता है।

Silent anxiety को पहचानने के लिए इसे समझना ज़रूरी है। क्योंकि लंबे समय तक नज़रअंदाज कर दिए जाने से धीरे-धीरे emotional burnout, sleep problems, guilt और low self-esteem जैसी समस्याओं में बदल सकता है। mental health को समझने के लिए बाहर से दिखाई देने वाला व्यवहार ही काफ़ी नहीं है बल्कि व्यक्ति के मन में चल रही उलझनों को समझना भी ज़रूरी होता है।

Silent Anxiety क्या है?

Silent anxiety साइलेंट एंग्जायटी (Silent Anxiety) DSM-5 या APA की official classification में कोई अलग मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर या डिजीज नहीं है। लेकिन मेंटल हेल्थ डिस्कशन में इसका इस्तेमाल ऐसी स्थिति के लिए किया जाता है जहां व्यक्ति अपनी एंग्ज़ायटी को भीतर ही भीतर दबाकर या छुपा कर रखता है और इसका कोई सिंप्टम बाहर से देखने पर नज़र नहीं आता। आमतौर पर बोलचाल में इसे high functioning anxiety भी कहा जाता है।

इसमें व्यक्ति हर परिस्थिति में स्ट्रॉन्ग दिखने की कोशिश करता है इसीलिए बाहर से शांत और नॉर्मल दिखाई दे सकता है। लेकिन भीतर ही बेहतर हर छोटी बात पर ज़रूरत से ज़्यादा सोच सकता है‌। भविष्य को लेकर डर महसूस कर सकता है या ख़ुद पर अननेसेसरी प्रेशर डाल सकता है। व्यक्ति को कई बार लगता है कि अगर वह बाहर से कमज़ोर दिखे तो लोग उन्हें जज करेंगे या फिर उनकी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाएंगे इसलिए वे अपनी परेशानियों को छुपाना सीख जाते हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक silent anxiety की पहचान नहीं हो पाती है जिस वजह से ट्रीटमेंट भी मुश्किल हो जाता है।

Silent Anxiety के Hidden Symptoms

कोई भी मेंटल हेल्थ इश्यू हो उसके सिंपटम अलग-अलग लोगों में अलग तरीके से नज़र आते हैं। कुछ लोग उसे छुपा कर रखते हैं ज़ाहिर नहीं होने देते हैं। जिस वजह से इसके सिंप्टम्स सभी में एक जैसे नज़र नहीं आते। हालांकि कुछ बातें कॉमन होती है जो सभी में पाई जाती हैं। इसका सबसे बड़ा संकेत है- लगातार मानसिक थकान महसूस करना। शारीरिक रूप से ज़्यादा काम न करने के बावजूद व्यक्ति mentally exhausted महसूस कर सकता है। उसे ऐसा भी फील होता है कि उसका दिमाग कभी आराम नहीं करता उसमें हमेशा कुछ ना कुछ चलता रहता है।

Overthinking भी इसका एक सिंपटम हो सकता है। ऐसे में लोग पुरानी बातों को बार-बार याद करते रहते हैं या फिर फ्यूचर को लेकर लगातार नेगेटिव या worst-case scenarios के बारे में सोचते रहते हैं। ऐसे लोगों में अपनी गलतियों को लेकर ख़ुद को जज करने और ब्लेम करने जैसी बातें भी देखी जा सकती हैं। कई बार में बाहर से सामान्य बातचीत कर रहे होते हैं डेली रूटीन पूरा कर रहे होते हैं। लेकिन इसके बावजूद उनके अंदर ही अंदर self-doubt और nervousness भी लगातार चलते रहते हैं।

Silent anxiety वाले लोगों में perfectionism भी देखा जा सकता है। यह हर काम को पर्फेक्ट तरीके से करने की कोशिश करते हैं। छोटी सी ग़लती होने पर भी ख़ुद से नाराज हो जाते हैं और माफ़ नहीं कर पाते। इसके अलावा sleep issues, irritability, muscle tension, stomach discomfort भी इसके सिंप्टम्स हो सकते हैं।

ऐसे लोग हमेशा दूसरों को खुश करने में भी लगे रहते हैं। इस तरह से देखा जाए तो overthinking, perfectionism, self doubt, mental fatigue, muscle tension और headache जैसे सिंप्टम्स silent anxiety के सिंपटम हो सकते हैं। यह ज़्यादातर हाई परफॉर्मिंग लोगों में पाया जाता है जो अपनी समस्या को छुपाते हैं। इस वजह से डायग्नोसिस मुश्किल हो जाता है।

आख़िर क्यों होती है Silent Anxiety?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण पूरी तरह सामने नहीं आ पाए हैं। लेकिन inherited traits, trauma जैसे फैक्टर्स इसका रिस्क बढ़ा देते हैं। अगर फैमिली में किसी को anxiety या दूसरी मेडिकल कंडीशंस हैं तो व्यक्ति में इसका रिस्क कई गुना बढ़ जाता है।

जेनेटिक फैक्टर्स के अलावा व्यक्ति की पर्सनैलिटी भी इसमें आम भूमिका निभाती है। परफेक्शनिस्ट अप्रोच और कंट्रोल की आदत anxiety को बढ़ाने का काम करती हैं। इसी तरह बचपन के अनुभव और परवरिश भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। जब किसी से बचपन से ही ज़्यादा एक्सपेक्टशंस रखी जाती हैं, हर काम को परफ़ेक्ट तरीके से करने की उम्मीद की जाती है। ऐसे लोगों में बड़े होकर परफेक्शन की आदत बढ़ जाती है। इन लोगों में silent anxiety अपेक्षाकृत ज्यादा देखी जाती है।

इसके अलावा Trauma का भी silent anxiety से सीधा कनेक्शन देखा गया है। बचपन में हुए फिजिकल और इमोशनल एब्यूज, असुरक्षित वातावरण या traumatic incidence व्यक्ति को इमोशनली सेंसिटिव बना देते हैं। जिससे व्यक्ति बाद में होने वाली छोटी-मोटी घटनाओं से भी ट्रिगर हो जाता है। इसके अलावा आधुनिक जीवन शैली जिसमें काम का दबाव, एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ और तुलना इसे और बढ़ाने का काम करते हैं।

Silent Anxiety को कैसे Manage करें?

Silent anxiety को manage करने की दिशा में सबसे पहला कदम होता है इसे पहचानना और मान्यता देना।

1.हर समय स्ट्रांग बने रहने की कोशिश कई बार इसे और बढ़ा देती है। इसलिए हमेशा सेल्फ सफिशिएंट, स्ट्रांग और इंडिपेंडेंस दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर आप इमोशनली वल्नरेबल महसूस कर रहे हैं तो उसे ईमानदारी से स्वीकार करना बेहद ज़रूरी है।

2.इसके बाद इसके कारण पर आते हैं । सबसे पहले यह पता करना ज़रूरी होता है कि किस वजह से anxiety महसूस हो रही है। इसे मैनेज करने के लिए सबसे ज़रूरी है कि अपनी भावनाओं को खुलकर ज़ाहिर करें। इसके लिए जर्नलिंग या डायरी लिखना बहुत अच्छा तरीका माना जाता है। इससे छुपा हुआ तनाव बाहर आता है और राहत महसूस होती है।

3.इसके अलावा डीप ब्रीदिंग और माइंडफुलनेस भी मान को शांत रखने में कारगर साबित होते हैं। रोजाना ऐसा करने से ओवरथिंकिंग या नेगेटिव थॉट्स पर कंट्रोल करना आसान होता है। इससए काम में फोकस बढ़ता है और डेली रूटीन को हैंडल करना आसान हो जाता है।

4.परफेक्शिनिस्ट अप्रोच छोड़ना भी एंग्जायटी काम करने में मददगार होता है। हमें यह मानना पड़ेगा की कोई भी व्यक्ति हर काम में परफेक्ट नहीं हो सकता है। इसके साथ ही कोई हर समय, वह हर काम को परफेक्टली कर भी नहीं सकता। इससे सेल्फ डाउट और सेल्फ ब्लेम वाली आदत कम होगी जो कि एंग्जायटी की एक बड़ी वजह है।

5.सही समय पर सोना और जगना हेल्दी लाइफ के लिए बेहद ज़रूरी है। 7-8 घंटे की अच्छी नींद तनाव को दूर भगाती है। इसके साथ ही रोजाना कम से कम आधे घंटे की फिजिकल एक्टिविटी भी हैप्पी हॉर्मोंस के रिलीज को बढ़ाकर anxiety कम करती है।

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6.सेहतमंद और संतुलित भोजन भी हेल्दी माइंड के लिए ज़रूरी होता है। हरी सब्जियां, फल, सलाद, ड्राई फ्रूट्स, डार्क चॉकलेट और नट्स में ऐसे माइक्रोन्यूट्रिएंट पाए जाते हैं जो मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

7.इस मुद्दे पर बात करना silent anxiety को हराने की दिशा में बेहद ज़रूरी कदम होता है, क्योंकि जैसे ही आप इस पर बात करना शुरू करते हैं यह साइलेंट नहीं रह जाता है। अपने करीबी लोगों, दोस्तों, परिवार के सदस्यों से अपनी फीलिंग्स के बारे में बात करने से न सिर्फ़ मन हल्का होता है बल्कि कई बार समस्या का समाधान भी मिल जाता है।

इसके साथ ही यह भी ध्यान देना बेहद ज़रूरी है कि अगर लक्षण गंभीर हैं तो प्रोफेशनल हेल्प लेना बेहद ज़रूरी हो जाता है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और मेडिसिंस इसमें बहुत कारगर साबित होती हैं। याद रखिए मदद लेना कमज़ोरी नहीं बल्कि self-awareness और emotional maturity को दिखाता है। मेंटल हेल्थ भी फिजिकल हेल्थ जितना ही ज़रूरी है। कुछ मामलों में तो यह उससे भी ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है क्योंकि मेंटल हेल्थ का असर फिजिकल हेल्थ पर गहराई से पड़ता है। इसलिए ख़ुद के प्रति थोड़ा संवेदनशील होना, आराम देना और ज़रूरत पड़ने पर मदद लेना बेहद ज़रूरी है।

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© प्रीति खरवार

Source:

https://bermancenteratl.com/symptoms-of-a-silent-anxiety-attack/

 

Priti Kharwar

प्रीति खरवार एक Freelance Writer हैं, जो शोध-आधारित हिंदी-लेखन में विशेषज्ञता रखती हैं। Banaras Hindu University से Psychology में Masters प्रीति को हिन्दी भाषा में लेखन के लिए भाषा सारथी सम्मान और United Nations Population Fund की तरफ से Laadli Media Fellowship भी मिल चुका है। प्रीति का लक्ष्य हिंदी भाषी पाठकों को Mental health और सामाजिक मुद्दों पर आसान और बोलचाल की भाषा में कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे लोग अपने जीवन में positive change ला सकें।

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