बाळउँ बाबा देसड़ऊ पद की व्याख्या
बाळउँ बाबा देसड़ऊ पद की व्याख्या बाळउँ बाबा देसड़ऊ पाँणी संदी ताति । पाणी केरइ कारणइ, प्री छंडइ अधराति …
बाळउँ बाबा देसड़ऊ पद की व्याख्या बाळउँ बाबा देसड़ऊ पाँणी संदी ताति । पाणी केरइ कारणइ, प्री छंडइ अधराति …
बाळऊं बाबा देसड़ऊं ‘ पद की व्याख्या बाळऊं बाबा देसड़ऊं, पाँणी जिहाँ कुवाँह। आधीरात कुहक्कड़ा, ज्यउँ माणसाँ मुवाँह ।। …
करहा लंब कराड़िआ…….तिण लाखीणा पन्न पद की व्याख्या करहा लंब कराड़िआ, बे-बे अंगुल कन्न। राति ज चीन्हो वेलड़ी, तिण …
करहा देश सुहामणउ …… करीरां झाड़ि पद की व्याख्या प्रसंग प्रस्तुत पद कवि कल्लोल द्वारा रचित राजस्थान के प्रसिद्ध …
देस विरंगउ ढोलणा….. कटाला खाइ पद की व्याख्या देस विरंगउ ढोलणा, दुखी हुया इहाँ आइ। मनगमता पाम्या नहीं, ऊँटकटाळा …
कबिरा खड़ा बजार में नाटक पर प्रश्नोत्तरी प्रश्न 1. कबिरा खड़ा बजार में नाटक के रचयिता का नाम बताएं। …
आवाज का नीलाम एकांकी की व्याख्या/मूल संवेदना आधुनिक हिंदी एकांकी के क्षेत्र में धर्मवीर भारती का स्थान महत्त्वपूर्ण है। …
रामधारी सिंह दिनकर कृत कृष्ण चेतावनी की मूल संवेदना/भावार्थ हिंदी के प्रसिद्ध कवियों में से एक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह …
सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘रे मन’ का भावार्थ सोहनलाल द्विवेदी आधुनिक काल के सुप्रसिद्ध कवि हैं। खड़ी बोली को साहित्य …
“कुछ न पूछ मैंने क्या गाया” मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। हिंदी साहित्य में …