National doctors day in India


परिचय- 

आज की तेजी से भागती दुनिया में इंसान सुबह से रात तक अपनी अंतहीन इच्छाओं को पूरा करने के लिए लगातार दौड़ता रहता है। ऐसे में वह खुद को ही भूल बैठा है। परिणाम स्वरूप इंसान ख़ुद अपने ऊपर ही ध्यान नहीं दे पाता। प्रकृति और पर्यावरण से भी उसका संबंध कमज़ोर होता जा रहा है। इसका ख़ामियाजा उसे स्वास्थ्य की कीमत पर भुगतना पड़ रहा। विज्ञान और तकनीक की निरंतर प्रगति के बावजूद नई-नई बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पूरी दुनिया में चिंता का कारण बन रही हैं। हालिया कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप इसका सबसे सटीक उदाहरण है। ऐसे में डॉक्टर्स की महत्ता, ज़िम्मेदारी और चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टर्स की सेवा और योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष दुनिया भर में एक निश्चित तिथि को डॉक्टर्स डे सेलिब्रेट किया जाता है। भारत में नेशनल डॉक्टर्स डे National doctor’s day in India प्रतिवर्ष 1 जुलाई को देश भर में मनाया जाता है।


इतिहास-

1991 से प्रतिवर्ष देशभर में National doctors day मनाया जाने की शुरुआत हुई। यह महान डॉक्टर, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक डॉ बिधान चंद्र रॉय के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इनका जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना में हुआ था। बिधान चंद्र राय पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री थे। इन्होंने 1948 से 1962 तक मुख्यमंत्री के तौर पर पश्चिम बंगाल के विकास और प्रगति में अपना अमूल्य योगदान दिया। गौरतलब है कि उनकी पुण्यतिथि भी 1 जुलाई (1962) को ही है। इन्होंने अपना पूरा जीवन जनमानस की भलाई और उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। इन्हें सम्मान देने के लिए ‘पश्चिम बंगाल का वास्तुकार’ भी कहा जाता है।



व्यक्तिगत जीवन-

डॉ बीसी रॉय ने अपने एमबीबीएस (MBBS) और एमडी (MD)की पढ़ाई कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से की। इसके बाद लंदन में एमआरपीसी (MRPC) और एफआरपीसी (FRPC) की डिग्री भी हासिल की। चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 1944 में इन्हें डॉक्टरेट ऑफ साइंस (Doctorate of Science) की उपाधि भी प्रदान की गई। 





योगदान-

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) के गठन में भी डॉक्टर बी सी रॉय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। गांधी जी के परम मित्र डॉक्टर बी सी राय ने भारत छोड़ो आंदोलन के समय 1942 में गांधी जी का इलाज भी किया था। डॉ बी सी रॉय ‘ब्रह्म समाज’ के सक्रिय सदस्य थे और इन्होंने विभिन्न सामाजिक आंदोलनों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। उनके सम्मान में 1991 में तत्कालीन भारत सरकार ने प्रतिवर्ष एक जुलाई को डॉक्टर से मनाने की पहल की। किसके साथ ही भारत सरकार ने 1961 में इन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया। 



थीम-

प्रत्येक वर्ष National doctors day सेलिब्रेट करने के लिए एक विशेष थीम रखी जाती है। इस वर्ष यानी 2023 के डॉक्टर्स डे के थीम “सेलिब्रेटिंग रेसिलियंस एंड हीलिंग हैंड्स” (celebrating resilience and healing hands) है जो कि कोरोना वायरस से संबंधित है। कोविड-19 महामारी के समय डॉक्टर्स ने ख़ुद की परवाह न करते हुए अपनी प्रतिबद्धता, समर्पण, सेवा और त्याग से लाखों लोगों की जान बचाई।


देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी-

डॉक्टर्स डे सेलिब्रेट करते हुए हमें देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी के योगदान को नहीं भूलना चाहिए। ऐसे समय में जब भारतीय समाज में महिलाओं की शिक्षा की बात तक करना असामान्य बात मानी जाती थी, उस समय में आनंदीबाई ने विदेश में जाकर मेडिकल की पढ़ाई की। डॉ आनंदीबाई जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 को पुणे में हुआ था। इनका विवाह 9 वर्ष की अल्पायु में 16 वर्ष बड़े गोपाल राव जोशी के साथ कर दिया गया था। महज 14 वर्ष की आयु में इन्होंने बच्चे को जन्म दिया, जिसकी 10 दिनों के भीतर ही बीमारी से आकस्मिक मृत्यु हो गई। इस सदमे ने आनंदीबाई को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया। वह नहीं चाहती थीं कि जिस तकलीफ़ से वह गुज़र रही हैं बाकी लोगों को भी गुजरना पड़े। इसलिए इन्होंने डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करने का संकल्प लिया।



आनंदीबाई मेडिकल में एमडी की पढ़ाई करने पेंसिल्वेनिया (अमेरिका) गईं। उल्लेखनीय है कि डिग्री हासिल करने के बाद आनंदीबाई वापस भारत आईं और अल्बर्ट एडवर्ड हॉस्पिटल की महिला वार्ड में चिकित्सक प्रभारी के रूप में पूरे समर्पण के साथ काम किया। दुर्भाग्यवश टीबी की बीमारी होने की वजह से मात्र 22 वर्ष की अवस्था में इन्हें हमेशा के लिए दुनिया छोड़कर जाना पड़ा। यह भारतीय चिकित्सा के क्षेत्र में और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। लेकिन इन्होंने मेडिकल की फील्ड में भारतीय महिलाओं के लिए नए रास्ते खोल दिए। इन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त कई रूढ़ियों को तोड़ने का भी काम किया। डॉ आनंदीबाई जोशी की चर्चा के बिना डॉक्टर्स डे सेलिब्रेट करना अधूरा है।



वैश्विक स्थिति-

विश्व स्तर पर डॉक्टर्स डे मनाने की शुरुआत सबसे पहले मार्च 1933 में जॉर्जिया से हुई। इसके बाद अलग-अलग देशों ने अपने अपने स्तर पर अलग-अलग तिथियों पर डॉक्टर्स डे की स्थापना की। संयुक्त राज्य अमेरिका में 30 मार्च को, चीन में 19 अगस्त, नेपाल में 4 मार्च, कनाडा में 1 मई, क्यूबा में 3 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। 


National doctors day in India 2023-

आज के दिन हम अपने डॉक्टर्स के प्रति कृतज्ञता और धन्यवाद व्यक्त करते हैं। हालांकि डॉक्टर बनना अपने आप में नोबल प्रोफेशन है, त्याग, सेवा और समर्पण इसके बुनियादी मूल्य हैं। परंतु धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर्स में से कुछ ऐसे डॉक्टर भी देखे गए हैं जो अपने क्षुद्र स्वार्थ और लालच की वजह से इस पेशे को कलंकित करने में लगे हैं। कुछ झोलाछाप डॉक्टर्स की वजह से मरीजों की जान मुश्किल में पड़ जाती है । ऐसे फर्ज़ी डॉक्टर्स की पहचान करना और उनका बहिष्कार करना नितांत आवश्यक है। जिससे अपने पेशे के प्रति ईमानदार, प्रतिबद्ध और समर्पित डॉक्टर्स और इस पेशे की गरिमा बनी रहे।


Doctors day पर मानवता की सेवा में इनके अमूल्य योगदान को चिन्हित करते हैं। साथ ही आमजन में स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता फैलाने का प्रयास करते हैं। बहुत सारे हॉस्पिटल्स, एनजीओज (NGOs) और सरकारी संस्थाएं भी इस दिन फ्री चैकअप, दवा वितरण और विभिन्न बीमारियों के प्रति जागरुकता अभियान चलाते हैं। National doctors day हमारे डॉक्टर्स की अटूट सेवा, अथक परिश्रम और मानवता के प्रति उनके योगदान को पहचान दिलाने, सम्मानित करने और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक ख़ास मौका है। ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम इस दिन को उन डॉक्टर्स के नाम करें जो हमारे लिए इतने महत्वपूर्ण होते हैं कि इनके बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती।


©प्रीति खरवार

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