पहिरण ओढण कंबळा, साठे पुरिसे नीर पद की व्याख्या
पहिरण ओढण कंबळा, साठे पुरिसे नीर पद की व्याख्या पहिरण ओढण कंबळा, साठे पुरिसे नीर । आपण लोक उभाँखरा, …
पहिरण ओढण कंबळा, साठे पुरिसे नीर पद की व्याख्या पहिरण ओढण कंबळा, साठे पुरिसे नीर । आपण लोक उभाँखरा, …
जिण भुइ पन्नग पीयणा, कयर-कँटाळा रूंख पद की व्याख्या जिण भुइ पन्नग पीयणा, कयर-कँटाळा रूंख । आके फोगे छाँहड़ी, …
मारू थाँकइ देसड़उ, एक न भाजइ रिड्ड पद की व्याख्या मारू थाँकइ देसड़उ, एक न भाजइ रिड्ड । ऊचाळउ …
बाबा म देइस मारुवाँ पद की व्याख्या बाबा म देइस मारुवाँ, सूधा एवाळाँह । कंधि कुहाड़ऊ, सिरि घड़ऊ, वासउ …
बाळउँ बाबा देसड़ऊ पद की व्याख्या बाळउँ बाबा देसड़ऊ पाँणी संदी ताति । पाणी केरइ कारणइ, प्री छंडइ अधराति …
बाळऊं बाबा देसड़ऊं ‘ पद की व्याख्या बाळऊं बाबा देसड़ऊं, पाँणी जिहाँ कुवाँह। आधीरात कुहक्कड़ा, ज्यउँ माणसाँ मुवाँह ।। …
सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘रे मन’ का भावार्थ सोहनलाल द्विवेदी आधुनिक काल के सुप्रसिद्ध कवि हैं। खड़ी बोली को साहित्य …
“कुछ न पूछ मैंने क्या गाया” मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। हिंदी साहित्य में …
धूमिल की अकाल दर्शन कविता का भावार्थ/ मूल संवेदना धूमिल हिंदी साहित्य के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कवि हैं। इनका …
“प्रेत का बयान कविता एक तीखा सामाजिक व्यंग्य है” कथन की समीक्षा प्रेत का बयान कविता प्रगतिवाद के प्रतिनिधि …