आधुनिक हिन्दी कविता

Table of contents

 

आधुनिक हिन्दी कविता – युग, कवि और प्रवृत्तियां

 

हिंदी साहित्य के आधुनिक काल को इतिहासकारों ने अपने अपने हिसाब से कई उपभेदों में बांटा है। यूं तो इतिहास लिखते समय इतिहासकार का अपना मत और अधिकार होता है कि वह किसी कालखंड को कितने भागों में बांटे और उनका क्या नाम रखें फिर भी मोटे तौर पर निम्न भागों में हिंदी साहित्य के आधुनिक काल को वर्गीकृत किया गया है-

भारतेन्दु युग -1887-1900 ई.

द्विवेदी युग -1900-1918 ई.

छायावाद -1918-1936 ई.

प्रगतिवाद -1936-1943ई.

प्रयोगवाद-1943-1950ई.

नयी कविता-1950-1960 ई.

साठोत्तरी कविता-1960-1975 और

समकालीन कविता -1975 से अब तक।

 

भारतेन्दु युग के महत्त्वपूर्ण साहित्यकार –

  1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  2. प्रताप नारायण मिश्र
  3. बालमुकुंद गुप्त
  4. बद्रीनारायण चौधरी प्रेमधन
  5. बालकृष्ण भट्ट
  6. राधाकृष्ण दास
  7. राधाचरण गोस्वामी
  8. ठाकुर जगमोहन सिंह
  9. अंबिकादत्त व्यास
  10. लाला श्रीनिवास दास
  11. श्रद्धा राम फुल्लोरी

भारतेंदु युग की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं

  1. गद्य के लिए खड़ी बोली की स्वीकृति
  2. भाषा का अमानक प्रयोग
  3. हिंदी प्रचार प्रसार के लिए मिशन भाव
  4. ‌प्राचीन काव्य रूपों का पुनर्सृजन
  5. ‌समाज सुधार का स्वर अथवा सामाजिक प्रतिबद्धता
  6. ‌‌पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन
  7. गद्य की विविध विधाओं का विकास
  8. ‌भक्ति पदों की रचना
  9. ‌राज प्रशस्ति का स्वर
  10. रीति की क्षीण प्रवृत्ति
  11. छंदों – अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग।

द्विवेदी युग के महत्त्वपूर्ण कवि –

  1. मैथिलीशरण गुप्त
  2. रामनरेश त्रिपाठी
  3. श्रीधर पाठक
  4. अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध
  5. महावीर प्रसाद द्विवेदी
  6. जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’
  7. सत्यनारायण ‘कविरत्न’
  8. गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
  9. नाथुराम शर्मा ‘शंकर’

द्विवेदी युग की विशेषताएं

  1. काव्य के सभी रूपों के लिए खड़ी बोली की स्वीकृति
  2. अनुवाद कार्य की अधिकता
  3. भाषा का मानकीकरण
  4. व्याकरण ग्रंथों की रचना
  5. राष्ट्रवाद का स्वर
  6. गंभीरता की प्रवृत्ति
  7. इतिवृत्तात्मकता
  8. पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन
  9. प्रबंध काव्यों की अधिकता
  10. रीतिकाल/ रीतिकालीन प्रवृतियों का विरोध
  11. नवीन छंदों का प्रयोग
  12. अलंकारों का समुचित निर्वहन
  13. व्याकरण ग्रन्थों की रचना

छायावाद के महत्त्वपूर्ण कवि

  1. जयशंकर प्रसाद
  2. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  3. सुमित्रानंदन पंत
  4. महादेवी वर्मा

 

छायावाद की महत्वपूर्ण विशेषताएं

  1. सौंदर्य के विविध आयाम- स्त्री सौन्दर्य, पुरुष सौन्दर्य और प्रकृति सौन्दर्य
  2. वैयक्तिकता
  3. वेदनानुभूति
  4. प्रकृति का मानवीकरण
  5. सांस्कृतिक धरोहरों का वर्णन
  6. देशप्रेम
  7. आध्यात्मिकता
  8. रहस्यवाद
  9. स्त्री के प्रति सखी भाव
  10. लाक्षणिकता
  11. चित्रात्मकता
  12. नाद सौंदर्य
  13. पाश्चात्य अलंकारों का प्रयोग
  14. छंदों का प्रशंसनीय प्रयोग

प्रगतिवाद के महत्त्वपूर्ण कवि

प्रवर्तक कवि-

  1. नागार्जुन
  2. केदारनाथ अग्रवाल
  3. त्रिलोचन

अन्य प्रगतिवादी कवि –

  1. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  2. सुमित्रानंदन पंत
  3. रामधारी सिंह दिनकर
  4. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
  5. रमाशंकर शुक्ल ‘रसाल’

 

प्रगतिवाद की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं

  1. शोषण के विरुद्ध स्वर
  2. शोषितों के प्रति पक्षधरता
  3. ईश्वर के प्रति अविश्वास
  4. कर्म सिद्धान्त और पुनर्जन्म के लिए अनास्था
  5. मार्क्सवाद के सिद्धांतों का पालन
  6. पूंजीवाद का घोर विरोध
  7. स्त्री के लिए समानता का दृष्टिकोण
  8. कपोल कल्पना के बजाय सामाजिक यथार्थ का चित्रण
  9. राजनीतिक प्रतिबद्धता
  10. बदलाव के लिए बेचैनी
  11. सरल भाषा
  12. छंदों, अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग

प्रयोगवाद के महत्त्वपूर्ण कवि

  1. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय
  2. मुक्तिबोध
  3. गिरिजा कुमार माथुर
  4. धर्मवीर भारती
  5. सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
  6. शकुन्तला माथुर
  7. कीर्ति चौधरी
  8. सुमन राजे

चारों सप्तकों के कवि

तार सप्तक (पहला सप्तक)

  1. गजानन माधव मुक्तिबोध
  2. नेमिचंद्र जैन
  3. भारत भूषण अग्रवाल
  4. प्रभाकर माचवे
  5. गिरिजाकुमार माथुर
  6. रामविलास शर्मा
  7. अज्ञेय

दूसरा सप्तक के कवि

  1. भवानी प्रसाद मिश्र
  2. शकुंतला माथुर
  3. हरिनारायण व्यास
  4. शमशेर बहादुर सिंह
  5. नरेश मेहता
  6. रघुवीर सहाय
  7. धर्मवीर भारती

 

तीसरा सप्तक के कवि

  1. कुँवर नारायण
  2. कीर्ति चौधरी
  3. सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
  4. मदन वात्स्यायन
  5. प्रयाग नारायण त्रिपाठी
  6. केदारनाथ सिंह
  7. विजय देवनारायण साही

चौथे सप्तक के कवि

  1. अवधेश कुमार
  2. राजकुमार कुंभज
  3. स्वदेश भारती
  4. नंदकिशोर आचार्य
  5. सुमन राजे
  6. श्रीराम वर्मा
  7. राजेंद्र किशोर

प्रयोगवाद की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं

  1. काव्य रचना हेतु नवीन विषयों का चयन
  2. अति बौद्धिकता
  3. क्षणवाद की वकालत
  4. आधुनिकता
  5. यौन कुंठाओं का खुला चित्रण
  6. रुढ़ियों और परंपराओं के प्रति उदासीनता
  7. भाषा के नये प्रयोग
  8. नये उपमानों और प्रतीकों की वकालत
  9. शैलीगत ताजगी
  10. नवीन छंदों का चलन

 

नयी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि

  1. अज्ञेय
  2. मुक्तिबोध
  3. सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
  4. गिरिजा कुमार माथुर
  5. केदारनाथ सिंह
  6. भवानी प्रसाद मिश्र
  7. शमशेर बहादुर सिंह

नयी कविता की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं

  1. आस्था का स्वर
  2. लघु मानव की अवधारणा का सृजन
  3. सामाजिक सरोकारों का आभास
  4. बौद्धिक विमर्श को स्थान
  5. क्षणवाद
  6. आधुनिकता की अवधारणा पर बल
  7. भाषा गत प्रयोग
  8. नवीन छंदों का प्रयोग
  9. प्रतीकों और उपमानों के प्रयोग में बदलाव

साठोत्तरी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि

  1. धूमिल (सुदामा पांडेय धूमिल)
  2. रघुवीर सहाय
  3. श्री कांत शर्मा

साठोत्तरी कविता की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं

  1. अनास्था का स्वर
  2. व्यवस्था के प्रति आक्रोश
  3. मोह भंग का स्वर
  4. बौद्धिक विमर्शों की अधिकता
  5. निराशा की स्थिति
  6. अकेलेपन और अजनबीयत की मन:स्थिति
  7. शोषण का तीव्र विरोध
  8. राजनीतिक दलों की मंशा पर सवाल
  9. सपाटबयानी
  10. छंदों-अलंकारों के प्रयोगों के प्रति उदासीनता

 

समकालीन कविता के महत्त्वपूर्ण कवि

  1. प्रियदर्शन
  2. कात्यायनी
  3. रुपम मिश्र
  4. नेहा नरूका
  5. जसिंदा केरकेट्टा
  6. मोहन मुक्त
  7. बच्चालाल उन्मेष
  8. श्रुति कुशवाहा
  9. विहाग वैभव
  10. कुमार अंबुज

अन्य अनेक रचनाकार भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं।

समकालीन कविता की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं

  1. सामाजिक प्रतिबद्धता,
  2. विमर्श की नवीन संभावनाएं ,
  3. अतीत का पुनर्पाठ ,
  4. अनास्था का स्वर ,
  5. हाशिये के लोगों का लेखन,
  6. सहानुभूति और समानुभूति की पड़ताल ,
  7. परंपरागत लेखन को चुनौती
  8. खेमेबाजियों का खुला विरोध,
  9. स्त्री विमर्श, दलित विमर्श और आदिवासी विमर्श सहित सभी वंचित समुदायों का कविता में प्रवेश,
  10. हास्य के साथ तीव्र व्यंग्य बोध,
  11. कविता लेखन की नयी भाषा का सृजन ,
  12. छंदों-अलंकारों की नवीनता को नकार,

 

© डॉ. संजू सदानीरा

 

अज्ञेय की काव्यगत विशेषताएं यहां पढ़ें..

https://www.duniyahindime.com/%e0%a4%85%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a5%87%e0%a4%af_%e0%a4%95%e0%a5%80_%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%97%e0%a4%a4_%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a4/

समकालीन कविता के बारे में अधिक जानकारी यहां से हासिल कर  सकते हैं..

https://www.duniyahindime.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/

 

 

Dr. Sanju Sadaneera

डॉ. संजू सदानीरा प्रतिष्ठित मोहता पीजी कॉलेज में प्रोफेसर और हिंदी साहित्य विभाग की प्रमुख हैं। इन्हें अकादमिक क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का समर्पित कार्यानुभव है। हिन्दी, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान विषयों में परास्नातक डॉ. संजू सदानीरा ने हिंदी साहित्य में नेट, जेआरएफ सहित अमृता प्रीतम और कृष्णा सोबती के उपन्यासों पर शोध कार्य किया है। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के स्नातक के पाठ्यक्रम के लिए इनकी किताबें विशेष उपयोगी हैं। ये "Dr. Sanju Sadaneera" यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी शिक्षा के प्रसार एवं सकारात्मक सामाजिक बदलाव हेतु सक्रिय हैं।

Leave a Comment