मधुआ कहानी जयशंकर प्रसाद, प्रश्नोत्तर

मधुआ कहानी जयशंकर प्रसाद, प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न1.- शराबी का मधुआ के प्रति कैसा व्यवहार था ? 

अथवा

शराबी के चरित्र पर एक टिप्पणी लिखें । 

 

उत्तर- मधुआ कहानी जयशंकर प्रसाद की एक मार्मिक कहानी है। प्रसाद जी हिन्दी कथा-जगत में अपनी खास शैली के लिए जाने जाते हैं। शराबी के चरित्र को सरसरी नजर से देखने पर वह एक गैर जिम्मेवार और व्यसनी व्यक्ति के रूप में दिखाई देता है।

कथा प्रवाह के साथ हार्दिक रूप से जुड़ते हुए जब उसके क्रियाकलापों पर ध्यान से नज़र डालते हैं, तो उसके तन की सीपी से मन के निर्मल मोती के दर्शन होते हैं। शराबी उस लाचार और अनाथ बच्चे (मधुआ) के लिए अपनी झोपड़ी ही नहीं, हृदय तक को पनाहगाह बना देता है अर्थात शराबी एक नेक दिल दयालु,भावुक और ईमानदार व्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। अनाथ बच्चे के प्रति ज़िम्मेदारी का भाव उसकी साफ और विस्तृत छवि प्रस्तुत करता है।

 

प्रश्न 2. मधुआ क्यों रो रहा था ?

उत्तर- धुआ को जमींदार के बेटे कुंवर साहेब ने शिकार पर जाने पर अपने कोट को पूरे दिन पकड़े हुए घुमाया। शिकार करने के दौरान छोटा-सा बच्चा दिन भर उनके कोट के वज़न को उठाये भूखा-प्यासा घूमता रहा।

शाम को देर हो जाने के कारण नियमानुसार वह अपने लिए आटा भी नहीं मांग सका कि आकर रोटी पकाकर खा सके। उस पर ज़ुल्म ये कि बोलने पर उसकी पिटाई कर दी, इसलिए मधुआ पिटाई और भूख की पीड़ा से परेशान होकर रो रहा था।

 

प्रश्न 3.- मधुआ कहानी की मूल संवेदना पर प्रकाश डालें।

उत्तर- मधुआ जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक अत्यंत मार्मिक कहानी है।

इस कहानी के माध्यम से प्रसाद जी ने बहुत ख़ूबसूरती से बताया है, कि दया, ममया, माया और करुणा के लिए बड़ी बड़ी-बड़ी डिग्रियों और दौलत की ज़रूरत नहीं होती। बड़े घर वालों के मन बहुत छोटे और टूटी झोपड़ी वाले का मन अमीर हो सकता है।

जमींदार के यहाँ बच्चा मार खाता है और गरीब शराबी के यहाँ भर पेट खाना, वो भी गहरे अपनत्व के साथ। छूटी हुई गृहस्थी एक बालक के मोह में शराबी फिर अपना लेता है और एक बेटे का बाप जमींदार ममत्वहीन जीवन जीता है। करुणा मनुष्य को ऐश्वर्य और सौन्दर्य से युक्त  करती है, न कि सांसारिक वैभव। यही इस कहानी का सार है।

 

© डॉ. संजू सदानीरा

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Priti Kharwar

प्रीति खरवार एक Freelance Writer हैं, जो शोध-आधारित हिंदी-लेखन में विशेषज्ञता रखती हैं। Banaras Hindu University से Psychology में Masters प्रीति को हिन्दी भाषा में लेखन के लिए भाषा सारथी सम्मान और United Nations Population Fund की तरफ से Laadli Media Fellowship भी मिल चुका है। प्रीति का लक्ष्य हिंदी भाषी पाठकों को Mental health और सामाजिक मुद्दों पर आसान और बोलचाल की भाषा में कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे लोग अपने जीवन में positive change ला सकें।

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