प्रगतिशील समाज: कविता

 

प्रगतिशील समाज: कविता

प्रगतिशील हो गया है समाज

स्त्रियों के लिए:

शिक्षा की बात करता है

स्टेटस सिम्बल के लिए, 

नौकरी की इजाजत देता है

घरेलू जिम्मेदारियों के साथ, 

पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा भी देता है

भाई के न होने पर, 

प्रेम-विवाह भी स्वीकार्य है

सजातीय होने पर, 

दहलीज पार करने की भी छूट है

घड़ी की सुइयों की तर्ज पर, 

फैसले लेने की आजादी है

रसोई के दायरे में, 

स्त्रियों को जन्म लेने देता है

कुलदीपक होने तक, 

साँस लेने देता है

उनकी नाक रखने तक. 

सचमुच, 

प्रगतिशील हो गया है समाज ..

 

© प्रीति खरवार

 

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Priti Kharwar

प्रीति खरवार एक Freelance Writer हैं, जो शोध-आधारित हिंदी-लेखन में विशेषज्ञता रखती हैं। Banaras Hindu University से Psychology में Masters प्रीति को हिन्दी भाषा में लेखन के लिए भाषा सारथी सम्मान और United Nations Population Fund की तरफ से Laadli Media Fellowship भी मिल चुका है। प्रीति का लक्ष्य हिंदी भाषी पाठकों को Mental health और सामाजिक मुद्दों पर आसान और बोलचाल की भाषा में कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे लोग अपने जीवन में positive change ला सकें।

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