दूसरों की मंजूरी की ज़रूरत क्यों होती है? जानें Approval Seeking के पीछे का मनोविज्ञान

 

क्या आप भी कहीं बाहर जाने से पहले तैयार होकर किसी की राय लेना पसंद करते हैं कि आप कैसे दिख रहे हैं? कपड़े, जूते, हेयर स्टाइल, एसेसरीज के लिए अपनी पसंद से पहले दूसरों की पसंद को प्राथमिकता देते हैं? या फिर जब कोई आपको अप्रूवल दे दे तब ही आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और आप अपने चुनाव से संतुष्ट हो पाते हैं? सिर्फ़ यहीं तक नहीं अपनी बात कहने से पहले दूसरों के रिस्पॉन्स का अंदाजा लगाकर अगर आप अपनी बात या उसे रखने के तरीके में बदलाव करते हैं।

इसी तरह अगर आप अपने किसी भी अचीवमेंट पर तब तक खुश नहीं हो पाते, जब तक दूसरे उसे मंजूरी न दे दें, इसे ही साइकोलॉजी में approval seeking या need for social approval कहा जाता है। इसमें हमारे लिए दूसरों की राई इतनी महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि वह हमारे फ़ैसले पर असर डालने लगती है।

Approval Seeking क्या है?

जब हमें हमारे अपने फ़ैसलों, व्यवहार, self worth/value के लिए बार-बार दूसरों के अप्रूवल की ज़रूरत महसूस होती है, तब इसे Approval Seeking कहा जाता है। इस तरह के बिहेवियरल पैटर्न वाला व्यक्ति हर छोटे बड़े फ़ैसले के लिए दूसरों की राय पर निर्भर हो जाता है, चाहे वह डेली रूटीन से जुड़े हों या फिर ज़िंदगी में बदलाव लाने वाले फ़ैसले हों। ऐसे व्यक्ति में low self esteem और low confidence भी देखा जा सकता है।

Jennifer Crocker और Connie Wolfe (2001) के Contingencies of Self-Worth model के अनुसार, कई लोगों का self-esteem कुछ specific domains पर निर्भर होता है, इनमें से एक महत्त्वपूर्ण domain “others’ approval” है। जब self-worth दूसरों की स्वीकृति पर टिका होता है, तो व्यक्ति बार-बार बाहरी approval की तलाश करता है।

इसी तरह, Jeffrey Young के Schema Therapy में इसे Approval-Seeking/Recognition-Seeking Schema कहा जाता है। इसमें व्यक्ति की self-esteem मुख्य रूप से दूसरों की प्रतिक्रियाओं पर निर्भर हो जाती है, और ख़ुद की प्राथमिकताओं की बजाय दूसरों के acceptance पर फ़ोकस किया जाता है।

यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि Approval Seeking अपने आप में कोई मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि एक तरीके का behavioral pattern है, जिसके पीछे एक तरह की Psychological tendency काम करती है। हालांकि यह Dependent Personality Disorder वाले व्यक्तियों में काफ़ी ज़्यादा पाया जाता है, लेकिन आम लोगों में भी Approval Seeking आसानी से देखा जा सकता है। समस्या तब हो जाती है जब व्यक्ति बिना बाहरी approval के कोई फ़ैसला ही न ले सके या फिर self worth महसूस न कर सके।

दूसरों की मंजूरी (Approval Seeking) की ज़रूरत क्यों होती है?

हर इंसान चाहता है कि उसे सराहा जाए, उसकी तारीफ़ हो और समाज में acceptance मिले, क्योंकि मनुष्य स्वभाव से सामाजिक होता है। इसके अलावा भी बहुत सारी फैक्टर होते हैं जो Approval Seeking के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।

1.Low Self-Esteem और Contingent Self-Worth

ऐसे व्यक्ति जिनका self esteem काम होता है वह अपनी value दूसरों के approval से जोड़कर देखते हैं इसलिए वह कोई भी फ़ैसला लेने के लिए दूसरों की राय पर निर्भर हो जाते हैं। Crocker n all ने अपनी रिसर्च में पाया है कि ऐसे लोगों में उनका self-esteem जीवन में मिलने वाली सफलता और असफलता पर निर्भर करता है। यानी किसी उपलब्धि पर self esteem ऊंचा हो सकता है वहीं किसी दूसरे मामले में फेल होने पर वह उतनी ही तेजी से गिर भी सकता है।

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2.Fear of Rejection और Fear of Negative Evaluation

जिन लोगों में रिजेक्शन का डर होता है या अपनी इमेज की बहुत ज़्यादा परवाह होती है, उनमें approval seeking pattern ज़्यादा देखा जाता है। Fear of Negative Evaluation (FNE) एक ऐसा ही psychological pattern है, ऐसे व्यक्ति लोगों के approval पाने और disapproval से बचने के लिए अपने व्यवहार में बदलाव करते रहते हैं। इनमें “लोग क्या कहेंगे” वाली सोच बहुत ज़्यादा हावी रहती है। यह social anxiety से भी जुड़ा पाया गया है।

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3.बचपन के अनुभव

Schema Therapy के अनुसार, ऐसे व्यक्ति जिन्हें बचपन में प्यार और तारीफ़ इस शर्त पर मिला है कि उन्होंने कितना अच्छा perform किया है या फिर कितने अच्छे से बड़ों की बातें मानी है, उन में आगे चलकर Approval Seeking के चांसेस ज़्यादा होते हैं। बचपन में “अच्छा बच्चा” बनने का कहा-अनकहा दबाव बड़े होने पर self worth को दूसरों के अप्रूवल से जोड़कर देखने वाला पैटर्न बनाने में अहम भूमिका निभाता है। बचपन के अनुभव किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व और behavioral pattern के बनने में ख़ासा योगदान देते हैं।

4.Social Acceptance की ज़रूरत

Roy Baumeister और Mark Leary (1995) के रिसर्च पेपर “The Need to Belong” के अनुसार, व्यक्ति में मजबूत और स्थिर interpersonal relationships बनाने और बनाए रखने की fundamental motivation होती है। Maslow की Need hierarchy theory में भी Belongingness एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता के तौर पर रखा गया है। जब व्यक्ति को लगता है कि उसके acceptance के लिए approval की ज़रूरत है तब उसमें approval seeking बढ़ सकता है।

Mark Leary की Sociometer Theory बताती है, Self-esteem एक तरह का internal monitor (sociometer) है जो बताता है कि हम दूसरों द्वारा कितने relationally valued हैं। जब यह वैल्यू कम होने लगती है तो हम acceptance बढ़ाने वाले व्यवहार की ओर बढ़ते हैं, जिनमें approval seeking शामिल है।

Approval Seeking को कैसे पहचानें?

जब किसी व्यक्ति को अपना self worth महसूस करने के लिए दूसरों की राय ज़रूरी लगे। जब उसका कॉन्फिडेंस external validation पर निर्भर करने लगे। जब व्यक्ति के किसी फ़ैसले यहां तक कि अपनी बात रखने के पहले भी “लोग क्या सोचेंगे” वाली सोच हावी होने लगे। दूसरों की नाराजगी के डर से अगर आप अपने फ़ैसले बदलने लगें या फिर आपका मूड दूसरों के राय से प्रभावित होता है, तो फिर इसे Approval Seeking कहा जा सकता है। आजकल सोशल मीडिया के जमाने में अपनी फ़ोटो और पोस्ट पर लाइक, कमेंट, और शेयर से दूसरों की वैलिडेशन देखना भी इसी का एक रूप है।

Approval seeking और People Pleasing में overlap होता है। बाहर से देखने में दोनों एक जैसे लग सकते हैं लेकिन दोनों एक जैसे नहीं हैं। People pleasing में मुख्य फ़ोकस दूसरों को खुश रखने पर होता है, जबकि approval seeking में ख़ुद को “सही/काफ़ी/अच्छा” महसूस करने के लिए approval की ज़रूरत होती है।

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क्या दूसरों की राय लेना हमेशा ग़लत है?

दूसरों की राय लेने और approval लेने में फ़र्क है। राय लेना एक हेल्दी अप्रोच है इसमें राय तो ली जाती है लेकिन फ़ैसला अपनी ज़रूरत, पसंद, इच्छा और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। जबकि Approval seeking में व्यक्ति दूसरों की वैलिडेशन के अनुसार अपने फ़ैसले लेता है। सोशल मीडिया के आ जाने के बाद से इसमें काफ़ी बढ़ोत्तरी हुई है। ख़ास तौर पर जब से ये प्लेटफ़ॉर्म्स आमदनी का ज़रिया बन रहे हैं, जहां लाइक, कॉमेंट्स, व्यूज, सब्सक्रिप्शन और शेयरिंग किसी की लोकप्रियता और आमदनी का पैमाना बन जाए ऐसे में यह बेहद नॉर्मल है। इसी तरह FOMO (Fear of Missing Out) जैसे experiences में approval seeking अहम भूमिका निभाता है।

Approval Seeking की आदत कैसे कम करें?

इस आदत को कम करने के लिए सबसे पहले तो जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है। आपको कैसी परिस्थितियों में दूसरों के अप्रूवल की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है उसे पहचानें और उस फ़ैसले के पीछे की अपनी वजहों को लिखें। “लोग क्या सोचेंगे” और “लोग क्या कहेंगे” वाली सोच को चलेंगे करें और अपने विचारों को फैक्ट की तरह लेने के बजाय हाइपोथेसिस की तरह टेस्ट करें।

छोटी-छोटी चीजों में ख़ुद फ़ैसले लेने की आदत विकसित करें। इसके बाद उन फ़ैसलों से आए नतीजों को नोट करें, इसे धीरे-धीरे कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। इसके अलावा अगर आप low self esteem से जूझ रहे हैं तो उस पर काम करें । साथ ही अपनी self worth के लिए एक्सटर्नल फैक्टर्स पर निर्भर न रहें।

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Approval seeking अपने आप में कोई mental disorder नहीं है, लेकिन जब इसकी वजह से आपका डेली रूटीन प्रभावित होने लगे, जब रिश्तो में लगातार insecurity रहे, जब आपका Self-worth दूसरों के अप्रूवल पर निर्भर करने लगे, आपको अपनी इच्छाओं, ज़रूरतों और प्राथमिकता को पीछे रखना पड़े, ऐसे में आपको इस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। इसकी वजह से अगर stress, anxiety या ऐसी दूसरी समस्याएं पढ़ने लगे तब आपको प्रोफेशनल हेल्प लेने के बारे में सोचना चाहिए।

 

FAQ

 

1.क्या approval seeking एक mental disorder है?

नहीं। यह एक common tendency है। Schema Therapy में इसे early maladaptive schema माना जाता है, लेकिन DSM में अलग disorder नहीं है।

2.क्या low self-esteem से approval seeking बढ़ सकता है?

हाँ। Contingent self-worth और low internal self-regard approval-seeking को बढ़ा सकते हैं।

3.दूसरों की राय की चिंता कम कैसे करें?

Awareness, values clarification, cognitive challenging, और gradual exposure to mild disapproval helpful हैं।

4.Approval seeking और people pleasing में क्या अंतर है?

Approval seeking में पहली ज़रूरत ख़ुद को “सही/काफ़ी” महसूस करने की होती है। People pleasing में फ़ोकस दूसरों को खुश रखने और conflict avoid करने पर होता है।

5.क्या social media approval seeking बढ़ा सकता है?

हाँ, कई स्टडीज से पता मिलता है कि quantifiable feedback और social comparison इसे बढ़ा सकते हैं।

 

© प्रीति खरवार

Reference:

https://www.psychologytoday.com/us/blog/your-emotional-meter/201807/how-to-let-go-of-the-need-for-approval

Priti Kharwar

प्रीति खरवार एक Freelance Writer हैं, जो शोध-आधारित हिंदी-लेखन में विशेषज्ञता रखती हैं। Banaras Hindu University से Psychology में Masters प्रीति को हिन्दी भाषा में लेखन के लिए भाषा सारथी सम्मान और United Nations Population Fund की तरफ से Laadli Media Fellowship भी मिल चुका है। प्रीति का लक्ष्य हिंदी भाषी पाठकों को Mental health और सामाजिक मुद्दों पर आसान और बोलचाल की भाषा में कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे लोग अपने जीवन में positive change ला सकें।

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