People Pleasing से बाहर कैसे निकलें? Healthy Boundaries बनाना सीखें
अगर हर बार “हाँ” कहना आपकी मजबूरी बन जाए, क्योंकि आपको डर लगता है कि कहीं सामने वाला बुरा न मान जाए,दूसरों की खुशी के लिए अपनी ज़रूरतों, इच्छाओं और मानसिक शांति से समझौता करना आपके रूटीन का हिस्सा हो। तो ऐसे में समझना ज़रूरी हो जाता है कि हर किसी को खुश रखने की कोशिश (People Pleasing) आपके आत्मसम्मान और रिश्तों और सेहत पर नकारात्मक असर डालती है। हालांकि पीपल प्लीजिंग कोई मेंटल डिजीज नहीं है बल्कि यह एक ऐसी आदत है जो ख़ुद को ही नुकसान पहुंचाती है। इसलिए हेल्दी बाउंड्रीज बनाना (Healthy boundaries) बेहद ज़रूरी हो जाता है। इसके लिए आपको अपने व्यवहार को समझने और धीरे-धीरे उसमें बदलाव लाने की ज़रूरत है।
Healthy boundaries बनाना क्यों ज़रूरी है?
लोगों की मदद करना अच्छी बात है लेकिन हर चीज की एक सीमा होती है। आपके पास समय और संसाधन सीमित होते हैं इसलिए आप हर किसी की मदद हर समय नहीं कर सकते हैं। अगर आपकी खुशी हमेशा दूसरों की खुशी पर निर्भर करने लगे तो एक समय बाद यह मानसिक थकान की वजह बन सकती है क्योंकि जब आप दूसरों की इच्छाओं, ज़रूरतों और खुशी को प्राथमिकता देते हैं तो अपनी भावनाओं को कहीं न कहीं अनदेखा करते हैं।
हालांकि शुरू-शुरू में यह व्यवहार रिश्तों को सहज और सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभाता है लेकिन समय के साथ व्यक्ति भावनात्मक रूप से थक जाता है। एक समय बाद उसे ख़ुद से ही शिकायत होने लगती है और धीरे-धीरे उसका आत्म सम्मान और आत्मविश्वास कम होने लगता है। इस तरह से आख़िरकार इसका असर रिश्तों पर भी पड़ने लगता है। ऐसे में “न” कहना सीखना न केवल अपनी मानसिक सेहत के लिए ज़रूरी है बल्कि यह एक सफल कॅरियर और अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए भी बेहद ज़रूरी है। इसके लिए नीचे दी गई बातों को ध्यान में रखना कारगर कदम साबित हो सकता है..
1. हर किसी को खुश रखना संभव नहीं है
पीपल प्लीजिंग से बाहर निकालने के लिए सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि आप चाहे जितनी कोशिश कर लें हर किसी को खुश नहीं रख सकते। कई बार ऐसा होता है कि अपने परिवार या दोस्तों के सर्कल में एक की खुशी दूसरे के दुख की वजह बन जाती है। ऐसी परिस्थितियों में आप चाह कर भी दोनों पक्षों को खुश नहीं रख सकते। आपकी बातों और व्यवहार से हमेशा हर कोई संतुष्ट नहीं रह सकता, जब आप इस सच्चाई को स्वीकार कर लेते हैं तो आप के ऊपर से लोगों को खुश करने का दबाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। “लोग क्या कहेंगे” की बजाय “क्या यह मेरे लिए सही है” इस पर फ़ोकस करना चाहिए।
people pleasing को समझने के लिए ये लेख पढ़ सकते हैं…
https://www.duniyahindime.com/people-pleasing-kya-hai/
2. Healthy Boundaries बनाना
Healthy Boundaries का मतलब लोगों से दूरी बना लेना नहीं है बल्कि अपनी सीमाओं का ध्यान रखना है। अगर आप पहले से बिजी हों या फिर आपकी प्राथमिकता उस समय के लिए कुछ और हो जो आपके टू डू लिस्ट या गोल्स को पूरा करने के लिए ज़रूरी हो, ऐसे में एक्स्ट्रा काम लेने से मना करना किसी भी रूप में ग़लत नहीं है।
अगर कोई बार-बार आपकी भावनाओं का ग़लत फ़ायदा उठा रहा हो तो उसे विनम्रता से मना करना है या अपनी बात रखना healthy boundaries का ही हिस्सा है। यह स्वार्थ नहीं है बल्कि आत्म सम्मान को दिखाता है। जो लोग आपका सम्मान करते हैं वह आपकी boundaries का भी सम्मान करेंगे। बाकी जो लोग आपका सम्मान नहीं करते उनके लिए हर वक़्त मौजूद रहना आपके आत्मसम्मान के लिए बेहद ज़रूरी है।
3. “न” कहना सीखें
बहुत-से लोगों के लिए “न” कहना सबसे कठिन काम होता है। उन्हें ऐसा लगता है कि अगर मैं किसी चीज के लिए मना कर दूं तो इससे हमारे रिश्ते खराब हो जाएंगे या फिर लोग मुझे ग़लत और स्वार्थी समझेंगे, जबकि हमेशा ऐसा नहीं होता है। सही तरीके से अपनी बात रखते हुए विनम्रता से “न” कहने से रिश्ते खराब नहीं होते हैं बल्कि लोग आप की बाउंड्रीज को समझते हैं। हालांकि “न” कहने के साथ-साथ उसे कहने का तरीका भी ठीक होना चाहिए।
जैसे,
“सॉरी, पर अभी मैं यह ज़िम्मेदारी नहीं ले पाऊँगी/पाऊँगा।”
“मुझे खुशी है कि आपने मुझ पर भरोसा किया, लेकिन इस समय मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं है।”
“इस बार मैं आपकी मदद नहीं कर पाई/पाया”।
“इस मामले में मैं आपकी मदद नहीं कर सकती/सकता बाकी मेरे लायक कुछ हो तो ज़रूर बताना।”
इस तरह के जवाब से आपकी हेल्दी बाउंड्रीज भी स्पष्ट होती हैं। इसके साथ ही यह एक सम्मानजनक तरीका भी है जिससे आप दूसरे को विनम्रता से मना कर सकें।
4. अपनी भावनाओं को पहचानें
कई बार ऐसा होता है कि कोई भी हमसे कुछ कहता है या किसी तरह की मदद के लिए कहता है तो हम बिना सोचे-समझे तुरंत “हाँ” कह देते हैं। इसके बाद आप चाह कर भी मना नहीं कर पाते क्योंकि फिर आप में अपनी बात से पलट जाने और दूसरों की नज़र में झूठा बन जाने का डर आ जाता है। इसलिए अगली बार आपको कोई कुछ कहे तो उसे जवाब देने से पहले ख़ुद से ये 3 सवाल पूछें..
1)क्या मैं सच में यह करना चाहती/चाहता हूँ?
2)क्या अभी मेरे पास इसके लिए समय है?
3)क्या मैं केवल सामने वाले को नाराज़ होने से बचाने के लिए “हाँ” कह रही/रहा हूँ?
इन सवालों के जवाब आपको सही फ़ैसला लेने में मदद करेंगे।
5. आत्मसम्मान (Self-Esteem) पर काम करें
People Pleasing व्यवहार के पीछे एक बड़ी वजह लो सेल्फ एस्टीम होती है। इस वजह से व्यक्ति अपनी पहचान को दूसरों की वैलिडेशन से जोड़कर देखता है। इसलिए वह किसी भी कीमत पर लोगों को हर समय खुश रखने की कोशिश करता रहता है। सेल्फ एस्टीम का मतलब है आप अपनी अच्छाई और कमी दोनों को उसी रूप में स्वीकार करें न कि दूसरों की राय देखकर खुद की पहचान बनाएं।
आपको यह याद रखना होगा कि आपकी वैल्यू इस बात से तय नहीं होती कि कितने लोग आपसे खुश हैं बल्कि इस बात से तय होती है कि आप ख़ुद की नज़र में क्या हैं। जब तक आप ही ख़ुद को वैल्यू नहीं देते हैं तब तक दूसरों से उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
6. अपराधबोध (Guilt) को समझें
Healthy boundaries बनाने में सबसे पहले गिल्ट होना सामान्य बात है। अगर आपने लंबे अरसे तक हर बात पर “हां” कहा है तो पहली बार “न” कहना आपको असहज कर सकता है या गिल्ट में ला सकता है। लेकिन गिल्ट से यह साबित नहीं होता है कि आपने कुछ ग़लत किया है। कई बार पुरानी आदत बदलने की वजह से भी यह असहजता आती है, जो समय के साथ धीरे-धीरे ठीक हो जाती है। जब-जब ऐसा महसूस हो तब-तब आप यह सोचे कि दूसरों को “हां” कहने के बाद जो आपको ख़ुद को लेकर गिल्ट होता है कि अपने लिए स्टैंड नहीं ले पाए-अब आप कम से कम उस गिल्ट से तो बच रहे हैं।
ओवरथिंकिंग को कम करने के तरीके जानने के लिए नीचे दिया गया लेख पढ़ सकते हैं..
https://www.duniyahindime.com/overthinking-kya-hai-kaise-roke/
7. खुद को प्राथमिकता देना सीखें
अगर आप हमेशा दूसरों की मदद करते रहेंगे लेकिन उस वजह से अपनी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक ज़रूरतों और इच्छाओं को नजरअंदाज करते रहेंगे तो एक वक़्त बाद बर्नआउट का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में आपके पास न तो अपने लिए ऊर्जा बचेगी न ही दूसरों के लिए। याद रखें ख़ुद को प्राथमिकता देना स्वार्थी होना नहीं है। आपका काम, नींद, आराम, सुकून यहां तक कि पसंदीदा गतिविधियों जैसे मूवी देखना, पेंटिंग, गार्डेनिंग, किताब पढ़ना या लिखना भी उतना ही ज़रूरी है, जितना किसी और की मदद करना। याद रखिए, जो आपके क़रीबी होंगे, शुभचिंतक होंगे, वे आपकी प्राथमिकताओं की कद्र करेंगे और बुरा नहीं मानेंगे।
दूसरों की मदद करना बेशक हमें मानवीय बनाता है, लेकिन ख़ुद का सम्मान करना और प्राथमिकता देना भी उतना ही ज़रूरी है। क्योंकि जब आप ख़ुद को प्राथमिकता नहीं देंगे, अपनी इच्छाओं और ज़रूरतों को पीछे रखेंगे तो आप कभी खुश और संतुष्ट नहीं हो सकते। जब तक आप ख़ुद में खुश नहीं रहते तब तक आप दूसरों को भी खुश नहीं कर सकते क्योंकि हम किसी और को वह चीज कैसे दे सकते हैं जो हमारे पास है ही नहीं?
© प्रीति खरवार
References:
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12318589/
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या People Pleasing पूरी तरह ख़त्म किया जा सकता है?
हाँ। Self awareness, healthy boundaries और regular practice से इस आदत को काफ़ी हद तक बदल सकते हैं।
2. क्या “न” कहना स्वार्थी होना है?
नहीं। सम्मान और विनम्रता से “न” कहना स्वस्थ रिश्तों और आत्मसम्मान का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
3. Healthy Boundaries क्या हैं?
Healthy boundaries वे नियम हैं जो आपकी भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक सेहत को ठीक रखने में योगदान देते हैं।
4. क्या People Pleasing रिश्तों को प्रभावित कर सकता है?
हाँ। यदि हमेशा एक ही व्यक्ति समझौता करता रहे, तो रिश्तों में असंतुलन और नाराज़गी पैदा हो सकती है।





