Low Self Esteem क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और आत्मसम्मान बढ़ाने के उपाय
हम जानते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। हम एक समाज में रहते हैं और चाहते हैं कि दूसरे लोग हमें पसंद करें, हमारी सराहना करें और हमारे बारे में अच्छी राय रखें। यह इच्छा बिलकुल स्वाभाविक है लेकिन समस्या तब होती है जब दूसरों की राय हमारी ख़ुशी और आत्म-सम्मान का पैमाना बन जाती है।
किसी के पसंद या नापसंद करने से जब हम अपने फ़ैसले बदलने लगें, दूसरों की नाराज़गी का डर हमारे कॉन्फिडेंस पर हावी होने लगे, ऐसे व्यक्ति में धीरे-धीरे low self esteem का पैटर्न विकसित हो जाता है। इसका असर न सिर्फ़ हमारी मानसिक सेहत पर पड़ता है बल्कि यह शारीरिक सेहत और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है।
Low Self-Esteem क्या है?
NAMI (National Alliance on Mental Illness) के अनुसार, self esteem इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति ख़ुद को कैसे देखता है और अपने बारे में कैसा महसूस करता है। High self esteem वाले लोग अपनी ख़ूबियों को पहचानते हैं और उसकी सराहना करते हैं जबकि low self esteem में लोग ख़ुद को प्यार, ख़ुशी और सफलता के काबिल ही नहीं समझते।
Self esteem व्यक्ति का ख़ुद के बारे में किया गया मूल्यांकन है जो कि तथ्यों के बजाय धारणाओं पर आधारित होता है। Psychology Tools के अनुसार, high self esteem वाले लोग ख़ुद को मूल्यवान मानते हैं और अपने अच्छे गुणों जैसे संवेदनशीलता, ईमानदारी और सच्चाई को पहचान पाते हैं। जबकि low self esteem में व्यक्ति ख़ुद को कमतर या कम मूल्यवान समझता है और लगातार negative self-talk करता है।
Low self esteem ज़्यादातर बचपन में शुरू होता है और लंबे समय तक बना रह सकता है। रिसर्चेज में पाया गया है कि यह मानसिक सेहत से जुड़ी दूसरी समस्याओं जैसे people pleasing, stress, anxiety depression को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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Low self esteem के लक्षण क्या हैं?
Low self esteem को पहचानने के लिए इसके संकेत पर ग़ौर करना ज़रूरी है जो कि इस प्रकार हैं…
1.लगातार ख़ुद की आलोचना करना और अपने बारे में नकारात्मक राय रखना
2.अपनी ख़ूबियों को नज़र अंदाज़ करना और ख़ुद को कम आंकना
3.अपने को दूसरों से कमतर समझना
4.अपनी उपलब्धियों का श्रेय ख़ुद के बजाय दूसरों को देना या फिर भाग्य को बताना
5.ग़लतियों के लिए ख़ुद को दोषी मानना भले ही परिस्थितियां कंट्रोल से बाहर हों
6.चुनौतियों, नए प्रयोग या अनुभव से बचना
7.अपनी तारीफ़ स्वीकार न कर पाना
8.People pleasing करना
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9.दूसरों को ख़ुश करने की कोशिश में बाउंड्री सेट न करना
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10.सेल्फ डाउट और असफलता का डर
Medical News Today और Verywell Mind में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अगर इस तरह के लक्षण किसी व्यक्ति में पाए जा रहे हैं तो लंबे समय में यह स्ट्रेस, एंग्ज़ायटी, डिप्रेशन और सोशल आइसोलेशन बढ़ा सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों में unhealthy coping mechanisms जैसे कि, मोबाइल एडिक्शन या नशे की लत विकसित हो सकता है।
Low self esteem क्यों होता है?
NHS के अनुसार low self esteem अक्सर बचपन और किशोरावस्था के अनुभवों से प्रभावित हो सकता है, लेकिन यह जीवन के बाद के चरणों में भी विकसित हो सकता है। माता-पिता, दोस्तों, रिश्तेदारों या क़रीबी लोगों से लगातार मिलने वाले नेगेटिव कमेंट्स जैसे कि “तुम देखने में अच्छे नहीं हो”, “तुम पढ़ने में कमज़ोर हो” क, “तुम डरपोक हो”, “तुमसे नहीं होगा” बच्चों के मन पर गहरा असर डालते हैं और उसकी सेल्फ इमेज को नेगेटिव बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
बचपन में अच्छा माहौल न मिलने, परिवार के क़रीबी सदस्यों की आलोचना, उपेक्षा, धमकी या ट्रॉमा की वजह से भी व्यक्ति में नेगेटिव थॉट डेवलप होना शुरू हो जाते हैं। साथ ही जब बच्चे को बेहद कठोर पैमाने पर लगातार परखा जाता है और जज किया जाता है तो इससे भी उसमें low self esteem की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है। इस तरह से नेगेटिव सेल्फ इमेज का पैटर्न आगे चलकर low self esteem के रूप में विकसित हो जाता है।
Self esteem को कैसे बढ़ाएं?
Science direct में प्रकाशित Journal of Research in Personality के systematic review और meta-analysis में 119 अध्ययनों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि self esteem को बढ़ाने के लिए Cognitive Behavioral Therapies (CBT) सबसे प्रभावी होती है। यहां कुछ रिसर्च आधारित तरीके बताए गए हैं जो इसमें बेहद कारगर साबित होते हैं..
1.Mayo Clinic और NHS दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि Negative belief को पहचानना और उन्हें चुनौती देना सेल्फ एस्टीम को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। जैसे कि अगर ख़ुद को लेकर कोई नकारात्मक विचार मन में आता है तो उसे नोट करें और ख़ुद से पूछे कि इसका सबूत क्या है? Mental filtering जैसी cognitive distortions को पहचानें।
2.अपनी उपलब्धियों, गुणों को लेकर डेली पॉजिटिव फीडबैक लिखें। यह perceptual bias को सुधारता है जिसमें लोग सिर्फ़ नेगेटिव पहलू पर फ़ोकस करते हैं। Fennell के CBT मॉडल में यह तकनीक प्रभावी साबित हुई है।
3.बहुत बार असफलता के डर से बहुत सारी चीजों को शुरू करने से बचते हैं ऐसे में छोटी-छोटी चुनौतियों से शुरुआत करें। छोटी-छोटी सफलताओं से आत्मविश्वास बढ़ता है और negative belief कमज़ोर होते हैं।
4.Self compassion को बढ़ाने का प्रयास करें। Meta-analysis में Compassion-Focused Therapy (CFT) self esteem बढ़ाने में मददगार साबित हुई है। अपने साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसे आप अपने प्रिय क़रीबी लोगों के साथ करते हैं।
5.हमेशा यथार्थवादी लक्ष्य बनाएं जिन्हें हासिल करना आपके लिए संभव हो। इससे असफलता का डर कम होता है और आत्मसम्मान भी बढ़ता है।
6.Self care और self love चुनें। नियमित एक्सरसाइज, हॉबीज, पर्याप्त नींद, हेल्दी फूड हैबिट और अच्छे रिश्ते self esteem को बढ़ाते हैं।
यह सारे तरीके हालांकि तुरंत असर नहीं करते लेकिन रेगुलर प्रैक्टिस से धीरे-धीरे बदलाव आता है जो कि इस पर अपेक्षाकृत स्थायी होता है। Low self esteem के संकेतों को समझें, इसको ठीक करने के लिए सबसे पहले ख़ुद से प्रयास करें। इसके बावजूद अगर समाधान नहीं निकलता तो आप मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल की मदद भी ले सकते हैं।
(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। व्यक्तिगत सलाह के लिए मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल की मदद लें।)
FAQs
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Low Self-Esteem क्या होता है?
Low Self-Esteem ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने मूल्य, क्षमताओं या गुणों को कमतर समझने लगता है। इसमें व्यक्ति ख़ुद के बारे में नकारात्मक राय रख सकता है, अपनी उपलब्धियों को कम आंक सकता है और दूसरों से लगातार तुलना कर सकता है।
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Low Self-Esteem के मुख्य लक्षण क्या हैं?
इसके सामान्य लक्षणों में लगातार खुद की आलोचना करना, अपनी खूबियों को नजरअंदाज करना, दूसरों से ख़ुद को कमतर समझना, तारीफ स्वीकार न कर पाना, self-doubt, असफलता का डर और लोगों को खुश करने के लिए अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करना शामिल हैं।
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Low Self-Esteem क्यों होता है?
Low Self-Esteem के पीछे बचपन के नकारात्मक अनुभव, लगातार आलोचना, उपेक्षा, bullying, trauma, असफल अनुभव और दूसरों की अवास्तविक अपेक्षाएं जैसे कई कारण हो सकते हैं। यह जीवन के बाद के अनुभवों से भी विकसित हो सकता है।
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क्या Low Self-Esteem और Low Confidence एक ही चीज हैं?
नहीं। दोनों आपस में जुड़े हो सकते हैं लेकिन एक जैसे नहीं हैं। Low confidence अक्सर किसी खास काम या परिस्थिति में अपनी क्षमता पर भरोसा कम होने से जुड़ा होता है, जबकि Low Self-Esteem में व्यक्ति अपने overall self-worth को ही कम आंक सकता है।
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क्या Low Self-Esteem को बढ़ाया जा सकता है?
हाँ। नकारात्मक मान्यताओं को पहचानना और चुनौती देना, self-compassion विकसित करना, छोटी-छोटी चुनौतियों का सामना करना और अपनी उपलब्धियों पर ध्यान देना self-esteem सुधारने में मदद कर सकता है। जरूरत पड़ने पर psychotherapy भी उपयोगी हो सकती है।
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Low Self-Esteem कैसे बढ़ाएं?
अपने negative self-talk को पहचानना, अवास्तविक अपेक्षाओं को चुनौती देना, छोटी और achievable goals बनाना, अपनी खूबियों और उपलब्धियों को स्वीकार करना तथा खुद के प्रति अधिक compassionate रवैया अपनाना इसके लिए मददगार हो सकता है।
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Low Self-Esteem और Mental Health में क्या संबंध है?
कम self-esteem व्यक्ति के विचारों और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है और कुछ लोगों में anxiety, depression, stress या social withdrawal जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। हालांकि low self-esteem अपने आप में किसी मानसिक बीमारी का निदान नहीं है।
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Low Self-Esteem के लिए Mental Health Professional की मदद कब लेनी चाहिए?
अगर कम self-esteem लंबे समय से बना हुआ है, रोजमर्रा के जीवन, रिश्तों या काम को प्रभावित कर रहा है या इसके साथ लगातार anxiety, depression, बहुत अधिक self-criticism या social withdrawal जैसी समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो mental health professional से बात करना उपयोगी हो सकता है।
© प्रीति खरवार
Sources:
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9276660/
https://www.verywellmind.com/signs-of-low-self-esteem-5185978



