निर्बल का बल कविता का मूल भाव

निर्बल का बल कविता का मूल भाव

 

मैथिलीशरण गुप्त हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रतिष्ठित कवियों में परिगणित किये जाते हैं। इन्हें हिन्दी का प्रथम राष्ट्र कवि होने का गौरव प्राप्त है। गुप्त जी द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि हैं। उनकी कविताओं में राष्ट्रीय गौरव, देश प्रेम और ईश्वर भक्ति के स्वर मुख्य रूप से मिलते हैं। साकेत इनके द्वारा रचित सुप्रसिद्ध महाकाव्य है, जो आधुनिक काल में अत्यधिक पठित और चर्चित है। यशोधरा, विष्णुप्रिया, जयद्रथ वथ इत्यादि इनकी अन्य प्रबंध रचनाएँ हैं। भारत भारती इनका राष्ट्रीय प्रेम पर आधारित सुप्रसिद्ध काव्य संग्रह है। 

 

निर्बल का बल मैथिली शरण गुप्त की राम की महिमा का गुणगान करने वाली एक भक्तिपरक कविता है। इस कविता में कवि राम पर अपनी आस्था व्यक्त करते हुए संदेश देते हैं कि राम निर्बल का बल है। कवि का यह भी कहना है कि जब हृदय में श्रीराम का निवास हो तो वहां भय का क्या काम! राम के परिचय में कवि का कहना है कि राम वही हैं, जो गिरे हुए का उद्धार करते हैं और दया के सागर हैं।

श्री राम भवसागर में बेड़ा पार लगाने वाले बताए गए हैं। कवि के अनुसार इस संसार में किसी को शरीर की शक्ति में आराम मिलता है। किसी को अपने मनोबल का भरोसा होता है, किसी को धन संपदा में संतोष मिलता है, जबकि दूसरी तरफ कवि को जानकी जीवन यथार्थ श्रीराम की भक्ति में आश्रय और मुक्ति की अनुभूति होती है। आठों पहर श्री राम का ध्यान करने वाले कवि पुनः कहते हैं कि जिस हृदय में श्री राम का वास हो,उस हृदय में भय के लिए कोई स्थान नहीं होता।

 

इस प्रकार इस कविता के माध्यम से गुप्त जी की श्रीराम के प्रति भक्ति भावना और आस्था की अभिव्यक्ति हुई है और यह कविता रामभक्ति शाखा की कविताओं में गिनी जा सकती है। 

 

© डॉ. संजू सदानीरा

 

मैथिलीशरण गुप्त : निर्बल का बल

 

निर्बल का बल राम है। 

हृदय ! भय का क्या काम है।

राम वही कि पतित-पावन जो

परम दया का धाम है,

इस भव सागर से उद्धारक 

तारक जिसका नाम है 

हृदय! भय का क्या काम है।

तन-बल, मन-बल और किसी को

धन-बल से विश्राम है,

हमें जानकी जीवन का 

बल निशिदिन आठों याम है।

हृदय! भय का क्या काम है।

 

 

महादेवी वर्मा रचित जो तुम आ जाते एक बार कविता का भावार्थ पढ़ने के लिये नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें..

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Priti Kharwar

प्रीति खरवार एक Freelance Writer हैं, जो शोध-आधारित हिंदी-लेखन में विशेषज्ञता रखती हैं। Banaras Hindu University से Psychology में Masters प्रीति को हिन्दी भाषा में लेखन के लिए भाषा सारथी सम्मान और United Nations Population Fund की तरफ से Laadli Media Fellowship भी मिल चुका है। प्रीति का लक्ष्य हिंदी भाषी पाठकों को Mental health और सामाजिक मुद्दों पर आसान और बोलचाल की भाषा में कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे लोग अपने जीवन में positive change ला सकें।

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